Jamshedpur News: कटक की विशेष सत्र अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा से कथित संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार इस्लामी विद्वान मौलाना अब्दुर्रहमान कटक़ी को करीब 10 साल बाद बरी कर दिया। मंगलवार को सुनाए गए इस फैसले के बाद उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई सुनवाई
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दो महीने के भीतर मुकदमे की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामले की सुनवाई में तेजी आई। अभियोजन पक्ष ने जांच अधिकारियों समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज कराए, जबकि अदालत ने आरोपी का धारा 313 के तहत बयान लेने के बाद अंतिम बहस सुनकर फैसला सुरक्षित रखा था।
दिल्ली, जमशेदपुर और कटक में दर्ज थे केस
मौलाना अब्दुर्रहमान कटक़ी पर दिल्ली, जमशेदपुर और कटक में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। उन पर अल-कायदा से जुड़े होने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस पूरे मामले की कानूनी पैरवी जमीयत उलेमा महाराष्ट्र की लीगल सहायता समिति ने की। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने दलील दी थी कि अभियोजन के कई गवाह अपने पुराने बयानों से मुकर चुके हैं।
बार-बार खारिज हुई जमानत याचिकाएं
गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए अदालतों ने मौलाना की जमानत याचिकाएं कई बार खारिज कर दी थीं। जमीयत की ओर से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई बार अपील की गई, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी। करीब एक दशक तक जेल में रहने के बाद अब अदालत के फैसले ने उन्हें बड़ी राहत दी है।
जमीयत ने फैसले को बताया न्याय की जीत
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि बिना पर्याप्त सबूतों के लोगों को आतंकवाद के मामलों में फंसाने की घटनाएं चिंताजनक हैं। वहीं जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि 10 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार मौलाना को न्याय मिला है और संगठन लगातार अदालत में मजबूती से पैरवी करता रहा।