Jharkhand News: झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात सहायक पुलिसकर्मियों ने अपनी नौकरी को लेकर चिंता जताई है. अनुबंध अवधि समाप्त होने से पहले उन्होंने सेवा नियमित करने और कार्यकाल बढ़ाने की मांग उठाई है. इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया.
2017 में हुई थी अनुबंध आधारित नियुक्ति
जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित 12 जिलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से 2500 सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली की थी. ये नियुक्तियां अनुबंध के आधार पर की गई थीं. फिलहाल करीब 1800 सहायक पुलिसकर्मी विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इनका अनुबंध जुलाई 2026 में समाप्त होने वाला है.
कई जिलों में निभा रहे सुरक्षा की जिम्मेदारी
सहायक पुलिसकर्मी पश्चिमी सिंहभूम, चतरा, पलामू, गढ़वा, दुमका, लातेहार, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम और गिरिडीह समेत कई संवेदनशील जिलों में तैनात हैं. इन इलाकों में वे लंबे समय से सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
“काम पूरा, सुविधाएं अधूरी”
झारखंड सहायक पुलिस प्रदेश एसोसिएशन के सचिव विवेकानंद गुप्ता ने कहा कि सहायक पुलिसकर्मी जिला बल के जवानों की तरह चौबीसों घंटे ड्यूटी करते हैं. उनसे गश्ती, एलआरपी, ट्रैफिक नियंत्रण और कार्यालय संबंधी कार्य भी कराए जाते हैं. इसके बावजूद उन्हें सीमित वेतन और कम सुविधाएं मिल रही हैं. उन्होंने बताया कि वर्तमान में उन्हें केवल 13 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है.
छत्तीसगढ़ मॉडल लागू करने की मांग
सहायक पुलिसकर्मियों ने सरकार से आग्रह किया है कि झारखंड में भी छत्तीसगढ़ की तर्ज पर व्यवस्था लागू की जाए. उनका कहना है कि वहां डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स का गठन कर सहायक आरक्षकों को स्थायी सेवा और बेहतर वेतनमान दिया गया है. झारखंड में भी इसी तरह का निर्णय लेने की मांग की जा रही है.
ज्ञापन में रखी गईं कई प्रमुख मांगें
वित्त मंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में कुल नौ मांगें शामिल हैं. इनमें जीपीएफ सुविधा लागू करना, चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के बराबर वेतनमान देना और पुलिस तथा गृह रक्षा वाहिनी की भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण देने जैसी मांगें प्रमुख हैं.
आश्वासन के भरोसे भविष्य की उम्मीद
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि फिलहाल सरकार की ओर से केवल आश्वासन मिला है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि लंबे समय से सेवा दे रहे सहायक पुलिसकर्मियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा.