जब हालात रास्ता रोकते हैं, तब हौसले ही रास्ता बनाते हैं। यह पंक्तियाँ जमशेदपुर के भूईयांडीह निवासी रोहित कुमार की जिंदगी पर पूरी तरह फिट बैठती हैं। आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और सीमित संसाधनों के बीच रोहित ने NEET 2025 में 549 अंक हासिल कर यह दिखा दिया कि मेहनत, जुनून और दृढ़ निश्चय से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
सब्जी का ठेला, मोबाइल कवर की दुकान और स्कूल की पढ़ाई
रोहित के पिता सब्जी बेचकर परिवार चलाते हैं और मां एक गृहणी हैं। आर्थिक हालात इतने मुश्किल थे कि रोहित और उनके भाई ने मोबाइल कवर की एक छोटी-सी दुकान शुरू की ताकि घर का खर्च निकल सके। इसी संघर्ष के बीच रोहित ने सरकारी स्कूल में महज 800 रुपये वार्षिक शुल्क पर 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की।
कोरोना काल में जगा डॉक्टर बनने का सपना
कोविड महामारी के दौरान रोहित मेडिकल स्टोर में काम करते थे। यहीं उन्होंने पहली बार डॉक्टर बनने का सपना देखा। NEET की जानकारी बड़े भाई से मिली और यहीं से शुरू हुआ उनका सफर। पहले प्रयास में 485 अंक आए, लेकिन रोहित रुके नहीं।
‘यकीन 2.0’ से मिली उड़ान, 14 घंटे की पढ़ाई बनी ताकत
फिजिक्सवाला के ‘Yakeen 2.0’ बैच में नि:शुल्क दाखिला मिलने के बाद रोहित ने पूरी ताकत झोंक दी। रोज़ाना 14 घंटे लोकल लाइब्रेरी में पढ़ाई की। रास्ते में बीमारियाँ, मानसिक थकान और परीक्षा के दिन हाथ पर मधुमक्खी का डंक तक आया, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी।
संघर्ष को सलाम: अलख पांडे पहुंचे जमशेदपुर
रोहित की इस मेहनत और सफलता ने देशभर में लोगों को प्रेरित किया। फिजिक्सवाला के संस्थापक और CEO अलख पांडे खुद दिल्ली से जमशेदपुर पहुंचे और रोहित को सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “रोहित ने यह साबित कर दिया है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।”
यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, यह उस जिद, जुनून और आत्मविश्वास की कहानी है, जो इतिहास रचने का माद्दा रखते हैं।