Adityapur: आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में इन दिनों कथित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में नगर निगम के कई निबंधित संवेदकों और संवेदक संघ द्वारा लगाए गए आरोपों ने विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि क्षेत्र में चल रही कई योजनाओं में पारदर्शिता की कमी देखने को मिल रही है।
संवेदकों ने अधिकारियों के खिलाफ शुरू किया आंदोलन
नगर निगम के 30 से अधिक निबंधित संवेदकों ने अपर नगर आयुक्त रवि प्रकाश और अकाउंट्स ऑफिसर अमित चौरसिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संवेदकों का आरोप है कि बिल भुगतान में अनावश्यक देरी की जाती है और विभिन्न फाइलों को लंबे समय तक लंबित रखा जाता है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अपर नगर आयुक्त के व्यवहार पर भी उठे सवाल
आंदोलन कर रहे संवेदकों का कहना है कि अपर नगर आयुक्त रवि प्रकाश का ठेकेदारों के प्रति रवैया सहयोगात्मक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार संवेदकों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है। कुछ संवेदकों ने यहां तक कहा कि अधिकारियों को सार्वजनिक व्यवहार से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।
कमीशन वसूली के गंभीर आरोप
संवेदकों ने आरोप लगाया है कि विकास योजनाओं के भुगतान और कार्यों से जुड़े मामलों में विभिन्न स्तरों पर कमीशन की मांग की जाती है। उनके अनुसार अपर नगर आयुक्त द्वारा 4 से 6 प्रतिशत, कार्यपालक अभियंता द्वारा 1 प्रतिशत, अकाउंट्स ऑफिसर द्वारा 1.5 प्रतिशत, जूनियर इंजीनियर द्वारा 3 प्रतिशत, सहायक अभियंता द्वारा 2 प्रतिशत तथा कार्यालय स्तर पर 0.5 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। संवेदकों का दावा है कि कुल मिलाकर 16 से 20 प्रतिशत तक की राशि विभिन्न स्तरों पर वसूली जाती है।
विकास योजनाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में संचालित कई विकास योजनाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। उनका आरोप है कि योजनाओं का उद्देश्य जनसुविधा बढ़ाने से अधिक वित्तीय अनियमितताओं का माध्यम बनता जा रहा है। यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो भविष्य में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
संपत्ति जांच की उठी मांग
कुछ स्थानीय नागरिकों और संवेदकों ने मांग की है कि केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियां नगर निगम के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच कराएं। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित अधिकारियों की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
सरकार की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामले को लेकर अब लोगों की नजर राज्य सरकार पर टिकी हुई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि क्या सरकार इन आरोपों की जांच कराएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल संवेदकों का आंदोलन जारी है और पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।