दस्तावेजों की जांच में सामने आई अनियमितता
नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के आवास से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई थी. जांच में पता चला कि वर्ष 2000 की झुग्गी पुनर्वास विभाग की आधिकारिक सूची में गुरुमंगल सिंह विर्क का नाम दर्ज नहीं है. इसके बाद निर्माण की वैधता पर सवाल खड़े हुए और प्रशासन ने आगे की कार्रवाई शुरू की.
नोटिस जारी कर दिया गया था 24 घंटे का समय
अवैध निर्माण की पुष्टि होने के बाद नगर निगम ने 2 जून को नोटिस जारी किया था. यह नोटिस आरोपी के परिजनों को सौंपा गया और उसकी एक प्रति संबंधित इमारत पर भी चस्पा की गई. परिजनों को निर्माण की वैधता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु 24 घंटे का समय दिया गया था.
समय सीमा बीतने के बाद शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
नगर निगम का कहना है कि तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद आरोपी पक्ष की ओर से कोई वैध दस्तावेज जमा नहीं किया गया. इसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई. प्रशासन का दावा है कि जिस निर्माण को हटाया गया, उसके समर्थन में कोई वैध कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए थे.
जहरीली शराब कांड में आरोपी की भूमिका की जांच जारी
गुरुमंगल सिंह करनैल सिंह विर्क का नाम हाल ही में सामने आए जहरीली शराब कांड से जुड़ा हुआ है. मामले की जांच अभी जारी है और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क तथा इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं.
जहरीली शराब पीने से गई थी 18 लोगों की जान
पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में जहरीली शराब पीने से 18 लोगों की मौत हो गई थी. मामले की जांच के दौरान महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पाया कि शराब में मिलाया गया मेथनॉल मौतों का प्रमुख कारण था.
मेथनॉल की बड़ी खेप भी हुई थी बरामद
पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नवी मुंबई के वाशी स्थित कार्यालय और भिवंडी स्थित गोदाम वाली कंपनी श्री रेक्स इंटरनेशनल से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी. इस दौरान अधिकारियों ने 5,929 किलोग्राम मेथनॉल जब्त किया, जिसे कथित रूप से अवैध तरीके से रखा गया था. जांच एजेंसियां अब जहरीली शराब की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान करने में जुटी हैं.