Latehar News : जिले के हेरहंज और बारियातू प्रखंड के जंगलों में केंदुपत्ता के कथित अवैध कारोबार को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिन जंगलों की इस वर्ष केंदुपत्ता संग्रहण के लिए आधिकारिक नीलामी नहीं हुई, वहां से बड़े पैमाने पर पत्तों की तुड़ाई और खरीद-बिक्री की चर्चाएं तेज हैं। इससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और राजस्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार बिदीर, डोंरांग, इचाक, खीराखाड़ और करंदाग समेत कई गांवों में केंदुपत्ता खरीद केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। ग्रामीणों से केंदुपत्ता खरीदकर उसे अन्य स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। बताया जाता है कि जंगलों से तोड़े गए पत्तों को पहले गांवों के खलिहानों में जमा किया जाता है और बाद में रात के समय वाहनों के जरिए बाहर भेजा जाता है।
ठेकेदारों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे कारोबार में कुछ ठेकेदारों की भूमिका हो सकती है। उनके माध्यम से स्थानीय लोगों से केंदुपत्ता खरीदा जा रहा है। यह भी चर्चा है कि मजदूरों और संग्रहकर्ताओं को कम भुगतान कर बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वन विभाग के राजस्व को नुकसान की आशंका
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन जंगलों की नीलामी नहीं हुई, वहां से केंदुपत्ता किस आधार पर बाजार तक पहुंच रहा है। यदि अवैध तुड़ाई और परिवहन की शिकायतें सही साबित होती हैं, तो इससे वन विभाग के राजस्व को भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही वन संपदा के संरक्षण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जंगल क्षेत्र की पहचान और आजीविका का प्रमुख आधार हैं। ऐसे में वन संपदा के अवैध दोहन पर रोक लगाना जरूरी है। अब लोगों की नजर वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।