Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में निर्वाचित होकर लोकसभा और विधानसभा पहुंचे सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है. अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह सभी मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराए. न्यायमूर्ति रंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय देते हुए 30 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
जिलों से मांगी जा रही है मुकदमों की जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मृणाल क्रांति राय ने अदालत को बताया कि इस संबंध में राज्य के अलग-अलग जिलों की अदालतों से जानकारी मांगी गई है. सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी स्थिति जुटाने में समय लग रहा है, जिस कारण रिपोर्ट दाखिल करने में देरी हो रही है. मामले में अधिवक्ता मनोज टंडन को हाईकोर्ट ने एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है.
हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की सुनवाई
दरअसल, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. अदालत यह जानना चाहती है कि जनप्रतिनिधियों पर दर्ज मामलों में सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हो रही है या नहीं. कोर्ट यह भी जांचना चाहता है कि इन मामलों की प्रकृति कितनी गंभीर है और पीड़ित पक्ष की स्थिति क्या है.
केस प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं हो रही?
हाईकोर्ट ने यह भी जानने की कोशिश की है कि कहीं किसी मामले में दबाव बनाकर शिकायतकर्ता को प्रभावित करने, केस कमजोर करने या प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई में देरी कराने की स्थिति तो नहीं है. अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई हो और पीड़ितों को उचित न्याय मिल सके.