गिरफ्तारी के बाद पार्टी ने भी अपनाया सख्त रुख
मामले में गिरफ्तारी के बाद मंगलुरु जिला यूथ कांग्रेस कमेटी ने बिना देर किए कार्रवाई की. जिला अध्यक्ष इब्राहिम नवाज की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि निजाम पर लगे आरोपों से संगठन की छवि और अनुशासन प्रभावित हुआ है. पार्टी ने साफ किया कि उसके सिद्धांतों और संगठनात्मक मूल्यों के खिलाफ किसी भी तरह की गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा. साथ ही यह भी कहा गया कि अनुशासनहीनता के मामलों में आगे भी सख्त कदम उठाए जाते रहेंगे.
निजी तस्वीरों और वीडियो के सहारे कारोबारी को बनाया गया निशाना
पुलिस जांच के अनुसार, पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई, जब जितेश की पहचान एक प्रतिष्ठित कारोबारी से हुई थी. आरोप है कि कारोबारी की निजी और आपत्तिजनक तस्वीरों तथा वीडियो का इस्तेमाल कर उसे ब्लैकमेल किया गया. शुरुआत में उससे 35 लाख रुपये की मांग की गई.
बदनामी और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के डर से कारोबारी ने चेक के माध्यम से यह रकम दे दी. लेकिन इसके बाद मांगों का सिलसिला थमा नहीं और अगले दो वर्षों में कथित तौर पर उससे कुल 2.77 करोड़ रुपये वसूल लिए गए.
मदद मांगने पहुंचे कारोबारी को ही मिला धोखा
जांच में सामने आया है कि जब लगातार बढ़ती मांगों से परेशान होकर कारोबारी ने मदद की उम्मीद में निजाम से संपर्क किया, तब हालात और बिगड़ गए. पुलिस का आरोप है कि कारोबारी की सहायता करने के बजाय निजाम ने जितेश का साथ दिया और कथित उगाही के पूरे नेटवर्क का हिस्सा बन गया. यही वजह रही कि कारोबारी लगातार दबाव और भय के माहौल में फंसता चला गया.
फर्जी आत्महत्या की कहानी बनाकर बढ़ाया गया दबाव
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कारोबारी को डराने के लिए एक और साजिश रची. मई 2024 में निजाम ने कारोबारी को बताया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है और उसके पास से मिले कथित सुसाइड नोट में कारोबारी का नाम लिखा हुआ है.
आरोप है कि इस कहानी को सच साबित करने के लिए जितेश की कथित मौत और अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें भी भेजी गईं. साथ ही कारोबारी को यह कहकर डराया गया कि उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. कानूनी पचड़े और सामाजिक बदनामी के डर से कारोबारी लगातार पैसे देता रहा.
दो साल बाद ऐसे खुली पूरे खेल की पोल
मामले का खुलासा जून 2026 में उस समय हुआ, जब कारोबारी ने मंगलुरु में जितेश को जीवित देखा. इसके बाद उसे पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ और उसने उर्वा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए निजाम और जितेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं नेताओं के साथ तस्वीरें
गिरफ्तारी के बाद निजाम की कर्नाटक और मंगलुरु के कई राजनीतिक नेताओं के साथ खिंचवाई गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. इन तस्वीरों को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का दौर शुरू हो गया है.
मंगलुरु में सामने आया यह मामला केवल करोड़ों रुपये की कथित उगाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ब्लैकमेल, फर्जी आत्महत्या की कहानी और लंबे समय तक मानसिक दबाव बनाकर पैसे वसूलने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं. पुलिस मामले की तह तक पहुंचने में जुटी है, जबकि यूथ कांग्रेस ने भी आरोपी नेता के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए साफ संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी.