Palamu News : पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड स्थित रेंगनिया जंगल में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की छापेमारी के बाद अवैध मिट्टी और मोरम खनन का मामला सुर्खियों में आ गया है। इस कार्रवाई ने न केवल अवैध खनन के संगठित नेटवर्क को लेकर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस और खनन रोकथाम के लिए गठित टास्क फोर्स की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
छापेमारी के दौरान एक पोकलेन मशीन और तीन 18 चक्का ट्रेलर जब्त किए गए थे। बताया जा रहा है कि इन वाहनों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर मिट्टी और मोरम के अवैध खनन तथा परिवहन में किया जा रहा था।
ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि उन्हें पिछले कई दिनों से ग्रामीणों द्वारा अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थीं। करीब 15 दिन पहले भी स्थानीय लोगों ने उन्हें ट्रैक्टरों के जरिए मोरम की ढुलाई की जानकारी दी थी। मंत्री ने ग्रामीणों को पुलिस और प्रशासन को सूचना देने की सलाह दी थी, लेकिन आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मंत्री के अनुसार ग्रामीणों ने पुलिस और संबंधित अंचलाधिकारी को भी अवैध खनन की सूचना दी थी, लेकिन इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उन्हें स्वयं मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करनी पड़ी।
राज्यसभा चुनाव की व्यस्तता के बीच पहुंचे मौके पर
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्यसभा चुनाव से जुड़ी व्यस्तताओं के बावजूद उन्हें अवैध खनन की शिकायतों को गंभीरता से लेना पड़ा। उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, जिसके बाद अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे वाहनों को जब्त किया गया।
मंत्री की इस कार्रवाई के बाद यह सवाल उठने लगा है कि जब स्थानीय लोगों द्वारा पहले ही सूचना दी जा चुकी थी, तो संबंधित विभागों और अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
पलामू जिले में लंबे समय से अवैध मिट्टी और मोरम खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन के बाद बड़ी मात्रा में मोरम ट्रेलरों के जरिए बिहार भेजा जाता है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में खनिज परिवहन के बावजूद रास्ते में कहीं भी प्रभावी जांच या रोकथाम नहीं हो पाती।
इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि परिवहन के दौरान संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और अवैध खनन के इस नेटवर्क को संरक्षण कौन दे रहा है।
टास्क फोर्स और प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
राज्य सरकार ने अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन कर रखा है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे मामलों ने टास्क फोर्स की सक्रियता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो अवैध खनन का यह नेटवर्क इतना मजबूत नहीं हो पाता। मंत्री की छापेमारी के बाद अब प्रशासनिक जवाबदेही और अधिकारियों की भूमिका भी चर्चा का विषय बन गई है।
रेंगनिया जंगल में हुई कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और खनन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि जब्त वाहनों के मालिकों, खनन में शामिल लोगों और पूरे नेटवर्क की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी, जवाबदेही और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।