Juhu Galli Redevelopment News: मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित जुहू गली इलाके की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल सकती है. करीब 101 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली इस विशाल झुग्गी बस्ती के पुनर्विकास की जिम्मेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को सौंपी गई है. इस परियोजना के तहत 28 हजार से अधिक पात्र परिवारों का पुनर्वास किया जाएगा और उन्हें नए पक्के घर उपलब्ध कराए जाएंगे.
सबसे ऊंची बोली और बड़ी किराया प्रतिबद्धता के दम पर रिलायंस ने मारी बाजी
स्लम पुनर्वास प्राधिकरण यानी एसआरए की निविदा प्रक्रिया में रिलायंस समूह की 4 आईआर रियल्टी डेवलपमेंट लिमिटेड और महादेव रियल्टर्स जुहू के संयुक्त उपक्रम ने सबसे ऊंची बोली लगाकर यह मेगा परियोजना अपने नाम की. करीब 700 करोड़ रुपये की ट्रांजिट किराया प्रतिबद्धता और 35.10 प्रतिशत प्रीमियम की पेशकश ने रिलायंस को अन्य दावेदारों से आगे पहुंचा दिया. इस परियोजना के लिए जिंदल साउथ वेस्ट और शापूरजी पल्लोनजी समूह ने भी बोली लगाई थी, लेकिन रिलायंस के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल कर ली.
28 हजार से ज्यादा परिवारों के लिए नए घर तैयार होंगे
करीब 101.36 एकड़ क्षेत्र में फैली जुहू गली बस्ती को मुंबई की सबसे बड़ी क्लस्टर पुनर्विकास योजनाओं में गिना जा रहा है. परियोजना के तहत 28 हजार से अधिक पात्र झुग्गीवासियों के लिए नए आवास बनाए जाएंगे. लंबे समय से बेहतर आवास का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए यह योजना बड़ी राहत लेकर आ सकती है.
सामान्य नियम से ज्यादा प्रीमियम देने की पेशकश की
आमतौर पर डेवलपर्स रेडी रेकनर दर का 25 प्रतिशत प्रीमियम एसआरए को देते हैं. हालांकि, इस परियोजना में रिलायंस ने 35.10 प्रतिशत प्रीमियम देने का प्रस्ताव रखा है. यही वजह रही कि कंपनी की बोली सबसे मजबूत मानी गई.
पारंपरिक मॉडल जहां सफल नहीं हुए वहां क्लस्टर नीति से होगा विकास
यह योजना महाराष्ट्र सरकार की क्लस्टर पुनर्विकास नीति के तहत संचालित की जाएगी. इस नीति का मकसद उन बड़े झुग्गी क्षेत्रों का विकास करना है, जहां पारंपरिक स्लम पुनर्वास मॉडल प्रभावी साबित नहीं हो पाए हैं. सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े स्लम क्लस्टर प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त विकास अधिकार और कई तरह की सुविधाएं देने का प्रावधान किया है. इससे बड़े उद्योग समूहों की दिलचस्पी भी बढ़ी है.
पुनर्विकास के दौरान किराया सहायता और अस्थायी व्यवस्था भी मिलेगी
परियोजना के दौरान प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आवास और किराया सहायता की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए रिलायंस को सुरक्षा जमा और किराया भुगतान के रूप में बड़ी राशि जमा करनी होगी, ताकि पुनर्विकास का काम बिना रुकावट आगे बढ़ सके.
धारावी के बाद मुंबई में एक और बड़े मॉडल के रूप में देखी जा रही है यह योजना
धारावी पुनर्विकास परियोजना के बाद जुहू गली परियोजना को भी मुंबई के बड़े स्लम पुनर्विकास मॉडलों में शामिल माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि रिलायंस की एंट्री से इस क्षेत्र में विकास गतिविधियों को नई गति मिलेगी और क्लस्टर पुनर्विकास मॉडल को भी मजबूती मिलेगी.
जुहू गली पुनर्विकास परियोजना सिर्फ इमारतों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों को बेहतर आवास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अगर परियोजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो यह मुंबई में बड़े पैमाने पर स्लम पुनर्विकास के लिए एक नई मिसाल बन सकती है.