Gujrat News : गुजरात पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह कथित तौर पर किराए पर लिए गए बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के जरिए करीब 310 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन में शामिल था। पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क के तार देशभर में दर्ज 290 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं।
बैंक खातों के जरिए करोड़ों का लेनदेन, तकनीकी जांच से खुला नेटवर्क का राज
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराए, जिनका उपयोग ठगी से प्राप्त रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और असली स्रोत छिपाने के लिए किया जाता था। पुलिस जांच में एक बैंक खाते से 193 शिकायतें जुड़ी मिलीं, जिनमें लगभग 282 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला। वहीं दूसरे खाते से 97 शिकायतें जुड़ी थीं, जिनमें 37 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध राशि का लेनदेन सामने आया।
साइबर क्राइम पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और अन्य डाटाबेस में दर्ज शिकायतों का विश्लेषण किया। तकनीकी निगरानी और वित्तीय लेनदेन की जांच के दौरान संदिग्ध खातों की पहचान हुई। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
कमीशन के बदले उपलब्ध कराए जाते थे खाते
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने या अन्य लोगों के बैंक खातों को साइबर अपराधियों को किराए पर उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, निवेश घोटाले, यूपीआई फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों से हासिल रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
देशभर में चल रहा है ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0, डिजिटल ठगी के खिलाफ सख्ती
गुजरात पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 के तहत हाल के महीनों में कई बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया गया है। इससे पहले भी करोड़ों रुपये के साइबर घोटालों से जुड़े कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराधी अब सीधे ठगी करने के बजाय बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे धन के प्रवाह का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए साइबर पुलिस लगातार तकनीकी निगरानी और वित्तीय जांच को मजबूत कर रही है।