पुराने टैक्स कानूनों से जुड़े मामलों के निपटारे पर रहेगा फोकस
प्रस्तावित अधिनियम में जीएसटी को शामिल नहीं किया गया है. इसका उद्देश्य जीएसटी लागू होने से पहले के विभिन्न कर कानूनों के तहत लंबित बकाया और विवादित मामलों का एकमुश्त समाधान करना है. इसके दायरे में बिहार वित्त अधिनियम 1981 के तहत सेल्स टैक्स, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम 1956 के तहत सीएसटी, झारखंड वैट अधिनियम 2005 के तहत वैट, बिजली शुल्क, लक्जरी टैक्स, विज्ञापन कर, प्रोफेशनल टैक्स, मनोरंजन कर और प्रवेश कर से जुड़े मामले शामिल किए गए हैं.
सरकार का मानना है कि इस पहल से लंबे समय से अटके कर विवादों का निपटारा तेजी से हो सकेगा और व्यापारियों समेत अन्य करदाताओं को भी राहत मिलेगी.
मूल कर राशि जमा करने पर ब्याज और जुर्माने में मिलेगी राहत
मसौदे के अनुसार, जिन मामलों में कर बकाया स्वीकार किया जा चुका है, उनमें मूल कर राशि का पूरा भुगतान करना होगा. हालांकि ब्याज और जुर्माने में 95 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रावधान रखा गया है.
वहीं 30 जून 2017 तक के आकलित कर बकाया मामलों में केवल 30 प्रतिशत कर राशि जमा करनी होगी, जबकि शेष 70 प्रतिशत राशि माफ की जा सकेगी. घोषणा पत्र, प्रपत्र और प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में 35 प्रतिशत राशि जमा करने पर 65 प्रतिशत तक की छूट का लाभ मिलेगा. इसके अलावा विवादित कर मामलों में भी 30 प्रतिशत राशि का भुगतान कर 70 प्रतिशत तक राहत प्राप्त की जा सकेगी.
अधिनियम लागू होने के बाद 90 दिनों के भीतर करना होगा आवेदन
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कानून लागू होने के 90 दिनों के भीतर संबंधित करदाता को निपटारे के लिए आवेदन करना होगा. विशेष परिस्थितियों में वाणिज्य कर आयुक्त इस अवधि को अधिकतम 30 दिन तक बढ़ा सकेंगे.
हर वैधानिक आदेश के लिए अलग आवेदन देना अनिवार्य होगा. साथ ही आवेदक को यह भी बताना होगा कि संबंधित मामले से जुड़ी कोई अपील, पुनरीक्षण याचिका या अन्य मामला किसी न्यायालय अथवा प्राधिकरण के समक्ष लंबित है या नहीं.
राशि के आधार पर अलग-अलग अधिकारियों को मिलेगी जिम्मेदारी
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, 5 लाख रुपये तक के मामलों का निपटारा राज्य कर पदाधिकारी करेंगे. 10 लाख रुपये तक के मामलों की जिम्मेदारी सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों को दी जाएगी. 50 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई उप आयुक्त स्तर के अधिकारी करेंगे, जबकि 50 लाख रुपये से अधिक राशि वाले मामलों का निपटारा संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा.
दस्तावेजों में कमी मिलने पर मिलेगा सुधार का मौका
यदि आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि या दस्तावेजों की कमी पाई जाती है तो विभाग 15 दिनों के भीतर नोटिस जारी करेगा. इसके बाद आवेदक को कमियों को दूर करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा. आवेदन पूरी तरह सही पाए जाने पर विभाग 30 दिनों के भीतर निपटारे का आदेश जारी करेगा.
झारखंड सरकार का यह प्रस्ताव पुराने कर विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. इससे लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान आसान हो सकेगा और व्यापारियों तथा अन्य करदाताओं को ब्याज और जुर्माने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. साथ ही इससे कर व्यवस्था को अधिक सरल और विवाद मुक्त बनाने में भी मदद मिलेगी.