Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा, किरीबुरू, मेघाहातुबुरु और चिड़िया स्थित सेल (SAIL) की लौह अयस्क खदानों में सोमवार को बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। प्रबंधन द्वारा नई व्यवस्था लागू किए जाने के विरोध में हजारों श्रमिकों ने बायोमीट्रिक हाजिरी दर्ज करने से इनकार कर दिया, जिससे खनन कार्य, लौह अयस्क की ढुलाई, लोडिंग और उत्पादन संबंधी गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। सुबह ड्यूटी पर पहुंचे कर्मचारियों का आरोप है कि जब वे पूर्व की तरह पंचिंग कार्ड के जरिए उपस्थिति दर्ज कराने टाइम ऑफिस पहुंचे, तो वहां न तो कार्ड उपलब्ध थे और न ही रजिस्टर। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना और सहमति के पुरानी व्यवस्था समाप्त कर दी गई, जिससे वे असमंजस की स्थिति में पड़ गए।
खदान क्षेत्रों में प्रदर्शन, प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी
नई व्यवस्था के विरोध में कई खदान क्षेत्रों में कर्मचारियों ने टाइम ऑफिस और अन्य प्रशासनिक इकाइयों के बाहर जुटकर प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर श्रमिकों ने टायर जलाकर प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए और एकतरफा फैसले का विरोध जताया। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी राय लिए बिना बायोमीट्रिक प्रणाली लागू करना उचित नहीं है। विवाद केवल दिन की पाली तक सीमित नहीं रहा। कर्मचारियों के अनुसार 14 जून की रात्रि पाली में काम करने वाले श्रमिक जब ड्यूटी समाप्त कर कार्ड आउट करने पहुंचे, तब तक पंचिंग कार्ड की व्यवस्था हटा दी गई थी। इससे कई कर्मचारियों को लंबे समय तक टाइम ऑफिस के बाहर इंतजार करना पड़ा। श्रमिक नेताओं ने इसे कर्मचारियों पर दबाव बनाने की रणनीति बताया है।
यूनियनों ने प्रबंधन के फैसले पर उठाए सवाल
मजदूर संगठनों का कहना है कि बायोमीट्रिक हाजिरी का मुद्दा अभी केंद्रीय स्तर पर श्रम अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने तक पुरानी उपस्थिति प्रणाली को जारी रखा जाना चाहिए। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि फेस रीडिंग आधारित नई व्यवस्था लागू करने से पहले कर्मचारियों और यूनियनों को विश्वास में नहीं लिया गया। श्रमिकों का कहना है कि उन्हें तकनीक आधारित उपस्थिति प्रणाली से मूल रूप से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद छुट्टी, वेतन, उपस्थिति रिकॉर्ड और अन्य सेवा शर्तों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है। यूनियनों का दावा है कि इस विषय पर कई महीने पहले स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
बस सेवा और खनन कार्य भी प्रभावित
मेघाहातुबुरु समेत अन्य खदान क्षेत्रों में सुबह से तनावपूर्ण माहौल बना रहा। कर्मचारियों के विरोध का असर ड्यूटी बसों के संचालन पर भी देखा गया। कई स्थानों पर नियमित कार्य प्रभावित हुआ, जिससे उत्पादन प्रक्रिया बाधित रही। चार प्रमुख लौह अयस्क खदानों में कामकाज प्रभावित होने से सेल को प्रतिदिन भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार उत्पादन और परिवहन रुकने से करोड़ों रुपये का असर पड़ने की संभावना है। फिलहाल प्रबंधन नई व्यवस्था लागू करने के अपने निर्णय पर कायम है, जबकि कर्मचारी और यूनियनें पुरानी हाजिरी प्रणाली बहाल करने की मांग पर अड़ी हुई हैं।
समाधान नहीं निकला तो बढ़ सकता है आंदोलन
खनन क्षेत्रों में उत्पन्न गतिरोध फिलहाल समाप्त होता नहीं दिख रहा है। श्रमिक संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया और लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अब प्रबंधन और यूनियनों के बीच होने वाली आगामी वार्ता पर टिकी हुई हैं।