Jamshedpur News : पोटका विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न जनहित और आदिवासी-मूलवासी मुद्दों को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन और माझी सुंडी समाज के पारंपरिक ग्राम प्रधानों के नेतृत्व में करीब 300 ग्रामीण तीर-धनुष के साथ उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
स्थानीय भागीदारी और पारंपरिक व्यवस्था के सम्मान की मांग
प्रतिनिधिमंडल में माझी बाबा राजा सुरेंद्र माझी, माझी बाबा मेघराय सोरेन, माझी बाबा साहेब हसदा समेत कई पारंपरिक ग्राम प्रधान शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पोटका क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों, माझी बाबा और ग्राम प्रधानों की उपेक्षा की जा रही है। धूमकुरिया भवन, रंकिनी मंदिर परिसर सहित कई योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा रही है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है।
सीएनटी-एसपीटी और पेसा कानून के पालन की उठाई मांग
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट और पेसा कानून के कथित उल्लंघन, अवैध खनन गतिविधियों तथा जल, जंगल और जमीन पर बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आदिवासी समाज के अधिकारों और पारंपरिक व्यवस्था को नजरअंदाज कर विकास कार्य किए जा रहे हैं, जो स्थानीय हितों के खिलाफ है।
दुखनी सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों से है। ऐसे में विकास कार्यों में स्थानीय लोगों, युवाओं और पारंपरिक ग्राम प्रधानों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
15 दिन का अल्टीमेटम, महापंचायत की चेतावनी
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को 15 दिनों का समय देते हुए मांगों पर कार्रवाई की अपेक्षा जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित अवधि में सकारात्मक पहल नहीं हुई तो पोटका विधानसभा क्षेत्र में वृहद ग्राम सभा और महापंचायत आयोजित कर आगे की आंदोलनात्मक रणनीति तय की जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और स्थानीय भागीदारी के बिना किसी भी विकास कार्य को स्वीकार नहीं किया जाएगा।