Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-06-17

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां में कृषि क्रांति, नाबार्ड और टाटा स्टील फाउंडेशन की “वादी परियोजना” से बंजर भूमि हुई उपजाऊ, किसानों की आय में वृद्धि

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले में कृषि क्षेत्र से एक प्रेरणादायक बदलाव की कहानी सामने आई है। कभी बंजर और अनुपजाऊ मानी जाने वाली जमीनें आज हरियाली से लहलहा रही हैं। नाबार्ड और टाटा स्टील फाउंडेशन की “वादी परियोजना” ने आदिवासी किसानों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इस पहल से किसान न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

संघर्ष से सफलता तक, सोनाराम सोरेन बने मिसाल
रांगामाटिया गांव के किसान सोनाराम सोरेन इस परिवर्तन की सबसे बड़ी मिसाल हैं। पांच वर्ष पहले तक उनकी एक एकड़ जमीन बंजर थी और परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी मुश्किल से चल पाती थी। लेकिन वादी परियोजना से जुड़ने के बाद उनकी खेती में नई जान आई और आज वे आर्थिक रूप से सशक्त किसान बन चुके हैं। बढ़ी हुई आमदनी से उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला चाईबासा के एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में कराया है।

सामूहिक खेती और बागवानी ने खोले विकास के द्वार
परियोजना के तहत सोनाराम समेत 16 परिवारों को जोड़कर 16 एकड़ क्षेत्र में सामूहिक खेती की शुरुआत की गई। किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर बागवानी की ओर प्रेरित किया गया। खेतों में आम्रपाली और मल्लिका किस्म के आम के साथ एल-49 किस्म के अमरूद के पौधे लगाए गए। इससे खेती को दीर्घकालिक आय का मजबूत आधार मिला।

मिश्रित खेती से मिली नियमित आमदनी
फलदार पौधों के बीच खाली जगह का उपयोग करते हुए किसानों ने सब्जियों की खेती भी शुरू की। मिश्रित खेती के इस मॉडल ने किसानों को नियमित आय का स्रोत उपलब्ध कराया। इससे पौधों के बड़े होने तक भी किसानों की कमाई जारी रही और खेती का जोखिम कम हुआ। यही मॉडल आज इलाके के कई किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का माध्यम बन गया है।

36 गांवों में फैल रही सफलता की हरियाली
वादी परियोजना का प्रभाव अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। जिले के 36 गांवों के 388 परिवार करीब 379 एकड़ भूमि पर इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। खेतों में 25 हजार से अधिक आम और 10 हजार अमरूद के पौधे लगाए गए हैं। इसका परिणाम यह है कि क्षेत्र में आम का उत्पादन बढ़कर लगभग पांच लाख किलोग्राम तक पहुंच गया है, जिससे किसानों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।

बिचौलियों से मुक्ति, किसानों को मिल रहा बेहतर दाम
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए 250 किसानों को जोड़कर “उआल-बाहा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी” का गठन किया गया है। गांव में आधुनिक पैक हाउस की स्थापना की गई है, जहां फसलों की ग्रेडिंग और पैकेजिंग की जाती है। इसके बाद उत्पादों को सीधे जमशेदपुर, सिनी और गम्हरिया की मंडियों तक पहुंचाया जाता है। इस व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका कम कर किसानों की आय बढ़ाने में अहम योगदान दिया है।
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !