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  • 2026-06-17

Jharkhand News: झारखंड ATS में बड़ा बदलाव, अब CID की निगरानी में होंगे आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच

Jharkhand: झारखंड में आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब ATS का संचालन और जांच संबंधी कार्य पूरी तरह अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के अधीन रहेगा। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय ने औपचारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। नए प्रशासनिक ढांचे के लागू होने के साथ ही एटीएस से संबंधित पूर्व में जारी सभी आदेश और व्यवस्थाएं निरस्त कर दी गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच में बेहतर समन्वय और प्रभावशीलता आएगी।

2015 में हुआ था ATS का गठन
झारखंड में आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखने और उनसे निपटने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ATS का गठन किया गया था। इसके लिए विशेष थाना भी स्थापित किया गया था। बाद में वर्ष 2021 में इसकी जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ाते हुए राज्य में सक्रिय संगठित अपराध गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई का दायित्व भी सौंपा गया था। नए आदेश के अनुसार ATS से जुड़े सभी मामलों की जांच, केस डायरी तैयार करना, सुपरविजन, प्रगति रिपोर्ट और अन्य अनुसंधान संबंधी कार्य CID की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किए जाएंगे। इन सभी गतिविधियों की निगरानी CID के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। हालांकि आतंकवाद विरोधी अभियानों को लेकर ATS को अलग परिचालन व्यवस्था दी गई है। किसी भी विशेष अभियान, सर्च ऑपरेशन या आतंकवाद निरोधक कार्रवाई के दौरान ATS के अधिकारी सीधे अभियान शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार कार्य करेंगे, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

गोपनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर
पुलिस मुख्यालय ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि ATS राज्य और देश की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील संगठन है। इसलिए इसके सभी अभियानों, जांचों और सूचनाओं को अत्यंत गोपनीय रखा जाएगा। अधिकारियों को सुरक्षा से जुड़े मामलों में उच्च स्तर की गोपनीयता और सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। नए ढांचे के लागू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आतंकवाद, स्लीपर सेल, उग्रवादी गतिविधियों और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में ATS और CID के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। इससे जांच की गुणवत्ता और कार्रवाई की गति दोनों में सुधार आने की संभावना है।
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