Ranchi News : JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्या केवल 14वीं JPSC परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले छह वर्षों में JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली के आरोप सामने आए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पिछले छह वर्षों में JSSC ने सहायक आचार्य के 26,001 पद, CGL के 2,200 पद, PGT के 3,120 पद और उत्पाद सिपाही के 583 पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परीक्षाओं में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं और नौकरियां बेचने का काम किया गया।
उन्होंने JPSC की 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं परीक्षाओं में भी गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाया। मरांडी ने कहा कि इन परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थी ही परीक्षा प्रक्रिया की वास्तविक समस्याओं और कथित अनियमितताओं को सबसे बेहतर तरीके से सरकार के सामने रख सकते हैं।
परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों से बातचीत की मांग
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि NSUI, झामुमो और वामदलों के छात्र संगठनों से जुड़े जो लोग संबंधित परीक्षाओं में शामिल ही नहीं हुए, वे परीक्षा से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को सरकार के सामने किस तरह रख सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि हर विवादित परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से अलग-अलग बातचीत की जाए और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए।
सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार केवल एक या दो परीक्षाओं पर ध्यान देकर पूरे विवाद का समाधान नहीं कर सकती। उन्होंने पिछले छह वर्षों में JPSC और JSSC की ओर से आयोजित सभी विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष CBI जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि किन परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं। जिन परीक्षाओं में अनियमितताएं साबित हों, उन्हें रद्द करने की भी उन्होंने मांग की।
सरकार पर भ्रम फैलाने का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार अभ्यर्थियों के बीच भ्रम पैदा करने और कुछ चुनिंदा चेहरों को मीडिया के सामने आगे कर पूरे मामले से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ कुछ छात्रों या एक परीक्षा का नहीं है, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को सभी विवादित परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।