Strait Of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बेहद राहत भरी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। महीनों से भू-राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रहा एलएनजी टैंकर “दिशा” आखिरकार सामरिक रूप से संवेदनशील स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित पार कर भारत पहुंच गया है। शुक्रवार को यह विशाल जहाज गुजरात के भरूच जिले में स्थित दहेज बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है, जिसे देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
62,370 मीट्रिक टन गैस की खेप, औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों को मिलेगी बड़ी राहत
यह जहाज अपने साथ 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) लेकर भारत पहुंचा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण खेप के आने से देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को खासी मजबूती मिलेगी और पिछले कई महीनों से बनी आपूर्ति संबंधी चिंताओं में कमी आएगी। भारत में बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, प्रमुख औद्योगिक इकाइयों और शहरी गैस वितरण (सीएनजी और पीएनजी) व्यवस्था के लिए यह गैस बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भू-राजनीतिक तनाव का अंत, कतर के रास लाफान में साढ़े तीन महीने फंसा रहा जहाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह जहाज बीती 2 मार्च को ही कतर के रास लाफान बंदरगाह से भारत के लिए एलएनजी लेकर रवाना होने की तैयारी में था। इसी दौरान होर्मुज क्षेत्र में अचानक बढ़े तनाव और प्रतिबंधात्मक परिस्थितियों के कारण इसकी यात्रा ठप हो गई। परिणामस्वरूप, इस जहाज़ी बेड़े को करीब साढ़े तीन महीने तक अनिश्चितता के बीच समुद्र में ही इंतजार करना पड़ा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी हड़कंप मच गया था।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाला पहला टैंकर, वैश्विक समुद्री व्यापार के सामान्य होने के संकेत
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचने वाला यह पहला एलएनजी टैंकर बताया जा रहा है। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के कारण इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई थी। “दिशा” के सुरक्षित रूप से दहेज बंदरगाह पहुंचने को अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा परिवहन के दोबारा सामान्य होने की दिशा में एक बड़े और सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दहेज बंदरगाह पर मुस्तैदी, पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए राज्यों को भेजी जाएगी गैस
गुजरात का दहेज बंदरगाह देश के सबसे प्रमुख एलएनजी आयात केंद्रों में शुमार है। यहां पहुंचने वाली प्राकृतिक गैस को देश के विभिन्न राज्यों तक फैले विशाल पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से फैक्ट्रियों और घरों तक पहुंचाया जाता है। यही वजह है कि “दिशा” टैंकर का दहेज पहुंचना केवल एक जहाज के आगमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे देश की समग्र ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाने वाली एक बेहद अहम घटना माना जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ेगी स्थिरता, एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा होगी मजबूत
दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में गिने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के बाद अब इस पूरे समुद्री मार्ग पर गतिविधियां पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। भारत के साथ-साथ अन्य एशियाई देशों के लिए भी यह राहत की बात है, क्योंकि इससे आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी और आयातित ईंधन पर निर्भर उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।