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  • 2026-06-20

US Iran Peace Talks: युद्धविराम के बाद बढ़ी उम्मीदें, अमेरिका और ईरान के बीच शुरू होने जा रही अहम बातचीत

US Iran Peace Talks: लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष थमने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. लंबे समय से अनिश्चितता में फंसी अमेरिका और ईरान की बातचीत का रास्ता साफ होता दिख रहा है. दोनों देशों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित बैठक के लिए रवाना हो चुके हैं, जिस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं.


अगले 60 दिनों में बड़े फैसले तक पहुंचने की कोशिश
हाल ही में दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले सहमति पत्र (MOU) पर हस्ताक्षर हुए थे. इसके तहत 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम समेत कई विवादित मुद्दों पर स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी. लेबनान में तनाव बढ़ने के कारण अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपना दौरा टाल दिया था, लेकिन अब अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ बातचीत का नेतृत्व करेंगे. वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस बैठक में शामिल होंगे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर पहले से स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं.

समझौते में प्रतिबंधों से राहत से लेकर अरबों डॉलर के फंड तक कई मुद्दे शामिल
प्रस्तावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर निगरानी और इसके बदले आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे विषय शामिल हैं. इसके अलावा ईरान को अपनी जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्तियों तक पहुंच मिलने और तेल निर्यात में छूट दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है. समझौते के तहत 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड से जुड़ी सुविधाओं पर भी चर्चा हो सकती है. साथ ही लेबनान में जारी तनाव और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा.

तेल बाजार पर दिखने लगा असर, दुनिया की नजरें कूटनीतिक प्रक्रिया पर
संभावित बातचीत का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी दिखाई देने लगा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति में सुधार देखा जा रहा है. ईरान ने सद्भावना के तौर पर घोषणा की है कि अगले 60 दिनों तक इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा. दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिका ने किसी दबाव में आकर यह पहल नहीं की है. उनका मानना है कि मौजूदा परिस्थितियां स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हैं. ऐसे में आने वाले 60 दिन न केवल अमेरिका और ईरान, बल्कि वैश्विक स्थिरता और पश्चिम एशिया के भविष्य के लिए भी अहम माने जा रहे हैं.
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