Adityapur: कहते हैं जहां चाह, वहां राह और जब बात पुलिस की चेकिंग से बचने की हो, तो जमशेदपुर और आदित्यपुर के वाहन चालक नए-नए रास्ते खोजने में पीएचडी कर लेते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प और हैरान करने वाला नजारा आदित्यपुर के पुराने पुल (ओल्ड ब्रिज) के पास देखने को मिला। लेकिन इस बार पुलिस भी "डाल-डाल तो पात-पात" वाली तर्ज पर पूरी तरह मुस्तैद दिखी।
चोर रास्ता पकड़कर भाग रहे थे वाहन चालक, पुलिस ने बीच रास्ते में ही घेरा
दरअसल, आदित्यपुर पुराना पुलिया के पास पुलिस द्वारा सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। हेलमेट, लाइसेंस और कागजातों की इस जांच से बचने के लिए कई चालाक वाहन चालकों ने एक अनोखा चोर रास्ता निकाल लिया। चेकिंग पॉइंट से ठीक पहले, बाईं ओर एक कच्चा रास्ता सीधे नदी किनारे की तरफ जाता है। लोग मुख्य सड़क छोड़ इस उबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते से होते हुए नदी के किनारे-किनारे पटियाला बार के पास मुख्य मार्ग पर सुरक्षित निकल जा रहे थे। जब पुलिस को भनक लगी कि मुख्य चेकिंग पॉइंट पर गाड़ियों की संख्या अचानक कम क्यों हो गई, तो उन्होंने मामले की तहकीकात की। जैसे ही इस सीक्रेट रूट का भंडाफोड़ हुआ, पुलिस ने तुरंत रणनीति बदली और उसी कच्चे रास्ते के बीचों-बीच एक नया सरप्राइज चेकिंग पॉइंट तैनात कर दिया। इसके बाद जो लोग पुलिस को चकमा देने की सोच रहे थे, वे सीधे पुलिस के जाल में जा फंसे।
चेकिंग वाली मुस्तैदी अपराध और छिनतई नियंत्रण में क्यों नहीं दिखती?
पुलिस की इस त्वरित रणनीति और मुस्तैदी ने सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आम जनता का प्रशासन से एक सवाल है "जिस चक्रव्यूह और चालाकी से पुलिस ने ट्रैफिक चेकिंग से भागने वालों को दबोचा, अगर उसका आधा हिस्सा भी आदित्यपुर-जमशेदपुर में बढ़ रहे अपराध, चोरी, मोबाइल छिनतई और सरेराह घूमने वाले असामाजिक तत्वों को दबोचने में लगाया जाता, तो आज आम जनता खुद को कितनी सुरक्षित महसूस करती?"
सड़क पर वसूली बनाम जनता की सुरक्षा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बात चालान काटने या ट्रैफिक चेकिंग की आती है, तो पुलिस की खुफिया व्यवस्था और रणनीति नेक्स्ट लेवल पर काम करती है। नदी किनारे के कच्चे रास्तों तक को ब्लॉक कर दिया जाता है। लेकिन जब इसी आदित्यपुर और आसपास के इलाकों में रात के अंधेरे में नशेड़ियों का जमावड़ा लगता है, राह चलती महिलाओं से चेन और मोबाइल छीने जाते हैं, या बंद घरों के ताले टूटते हैं, तब पुलिस की यह रणनीतिक मुस्तैदी और सरप्राइज चेकिंग कहाँ गायब हो जाती है. जनता को राहत तब मिलेगी जब पुलिस का यही सिंघम अवतार और हाई-टेक दिमाग चालान काटने के बजाय सड़कों को अपराधियों से मुक्त कराने में दिखाई देगा।