Jharkhand News: स्वास्थ्य विभाग के कथित गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक होने से जुड़े बहुचर्चित मामले में अदालत की सुनवाई के दौरान नया घटनाक्रम सामने आया है. अभियोजन पक्ष ने दावा किया है कि मामले की जांच और ट्रायल के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी शंभू सिंह की भूमिका की भी जांच जरूरी हो गई है. इसी को लेकर उन्हें मामले में आरोपी के रूप में शामिल करने का अनुरोध अदालत से किया गया है.
एमपी-एमएलए मामलों की विशेष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान इस मांग पर सरयू राय की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया. अदालत ने समय की मांग स्वीकार करते हुए अंतिम अवसर प्रदान किया और मामले की अगली सुनवाई 29 जून निर्धारित कर दी.
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि ट्रायल के दौरान पेश हुए चार गवाहों ने अपने बयान में शंभू सिंह का उल्लेख किया है. गवाहों के अनुसार, कथित रूप से लीक हुए दस्तावेजों की तस्वीरें लेने की प्रक्रिया में उनकी मौजूदगी देखी गई थी. इसी आधार पर उन्हें भी मामले में शामिल करने की मांग की गई है, ताकि पूरे घटनाक्रम की भूमिका और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण हो सके.
दरअसल, यह मामला वर्ष 2022 में सामने आया था, जब स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विवाद खड़ा हो गया था. आरोप लगाया गया था कि विभागीय अभिलेखों की जानकारी बाहर लाई गई और बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कोविड प्रोत्साहन राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए. इस मामले को लेकर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता भी राजनीतिक विवादों के केंद्र में रहे थे.
पुलिस जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया था और तब से मामले की सुनवाई जारी है. अब तक एक दर्जन से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. ऐसे में शंभू सिंह को आरोपी बनाए जाने की मांग ने मुकदमे को एक नया आयाम दे दिया है.