डॉलर की मजबूती और वैश्विक बिकवाली से बढ़ा दबाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा संकेत निवेशकों की उम्मीद से अधिक सख्त रहे हैं. वहीं अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में आई गिरावट के बाद कई निवेशकों ने अपने नुकसान की भरपाई के लिए सोने में बिकवाली शुरू कर दी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सहमति से कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन मजबूत डॉलर के असर के सामने यह राहत ज्यादा असरदार साबित नहीं हुई. विशेषज्ञों ने मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
सोना 1.44 लाख के नीचे पहुंचा, आगे और गिरावट की आशंका
एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में 1.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद सोने का भाव घटकर 1,44,759 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी जारी रहने की स्थिति में कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है. विश्लेषकों का मानना है , कि अगर गिरावट का सिलसिला जारी रहता है तो सोना 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर की ओर भी बढ़ सकता है.
चांदी भी लुढ़की, अब बाजार की नजर अमेरिकी आंकड़ों पर
सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी देखने को मिली. एमसीएक्स पर जुलाई सिल्वर फ्यूचर्स 0.71 प्रतिशत टूटकर 2,24,227 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया. बाजार विश्लेषकों के मुताबिक चांदी को फिलहाल 2,21,000 रुपये और 2,16,600 रुपये के स्तर पर महत्वपूर्ण सपोर्ट मिल रहा है. इस बीच डॉलर इंडेक्स बढ़कर 101.52 पर पहुंच गया है, जो पिछले एक साल के उच्च स्तरों में शामिल है. चूंकि सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए अन्य देशों के खरीदारों के लिए इसकी खरीद महंगी हो जाती है. अब निवेशकों की नजर अमेरिका के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर आंकड़ों पर है, जिनसे आगे की दिशा तय हो सकती है. भारत जैसे देशों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक संकेत सीधे कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित करते हैं.