Jharkhand Promotion Policy: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने राज्य सरकार द्वारा प्रोन्नति संबंधी संकल्प संख्या-3286 (04 अप्रैल 2014) में किए गए संशोधन पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग को पत्र भेजा है। संघ ने 2 जुलाई 2026 को मंत्रिपरिषद के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा है कि इससे वर्ष 2014 में लागू एकरूप प्रोन्नति नीति की मूल भावना प्रभावित हो सकती है।
2014 की समान प्रोन्नति व्यवस्था पर संशोधन से असमानता बढ़ने की आशंका
संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार सिंह और महासचिव राजेश कुमार सिंह ने पत्र में कहा कि वर्ष 2014 के संकल्प का उद्देश्य विभिन्न सेवा संवर्गों में प्रोन्नति के लिए समान अर्हकारी सेवा अवधि तय करना और सभी के बीच समानता सुनिश्चित करना था। उनका कहना है कि प्रस्तावित संशोधन इस उद्देश्य के विपरीत है और इससे अलग-अलग सेवा संवर्गों के बीच असमानता बढ़ने की आशंका है।
12 साल पुरानी व्यवस्था में बदलाव के कारण और प्रभाव स्पष्ट करने की मांग
संघ ने सवाल उठाया कि लगभग 12 वर्षों से प्रभावी व्यवस्था में संशोधन की आवश्यकता किन प्रशासनिक, विधिक या लोकहित से जुड़े कारणों के आधार पर महसूस की गई, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। साथ ही संशोधन से प्रभावित सेवा संवर्गों और इसके प्रशासनिक, विधिक एवं वित्तीय प्रभावों का भी कोई विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
बिना समीक्षा संशोधन पर सवाल
पत्र में कहा गया है कि बिना समग्र प्रभाव अध्ययन, सभी सेवा नियमावलियों की व्यापक समीक्षा और संभावित परिणामों के उचित मूल्यांकन के केवल आंशिक संशोधन करना नीतिगत, प्रशासनिक और विधिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। संघ ने यह भी कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वर्ष 2014 के संकल्प के अनुरूप किन-किन सेवा नियमावलियों में संशोधन अधिसूचित किए जा चुके हैं।
सीएम से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने मुख्यमंत्री और कार्मिक विभाग से मंत्रिपरिषद के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संघ का कहना है कि व्यापक समीक्षा और सभी पहलुओं के मूल्यांकन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए, ताकि प्रोन्नति व्यवस्था में एकरूपता और समानता की मूल भावना बरकरार रह सके।