DD Bar Murder Case: जमशेदपुर के डीडी बार हत्याकांड और जानलेवा हमले के मामले में गिरफ्तार भाजपा नेता सह बार संचालक नीरज सिंह की पुलिस हिरासत को लेकर बुधवार को जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय (जमशेदपुर कोर्ट) में कानूनी सवाल खड़े हो गए. वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश झा ने आरोप लगाया कि ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाने के बाद भी नीरज सिंह को अब तक स्थानीय अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया है. अधिवक्ता ने इस संबंध में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में आवेदन दाखिल कर नीरज सिंह की गिरफ्तारी, ट्रांजिट रिमांड और पुलिस हिरासत की वैधता को चुनौती दी है.
एमजीएम थाने में रखने को बताया अवैध
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश झा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें सुचना मिली कि नीरज सिंह को ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाने के बाद एमजीएम थाने में रखा गया है, जो कि पूरी तरह नियमों के खिलाफ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि "ट्रांजिट रिमांड का मुख्य उद्देश्य आरोपी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित ले जाने में लगने वाले समय को कानूनी मान्यता देना होता है. इसका मतलब यह कतई नहीं है कि पुलिस आरोपी को गंतव्य पर पहुंचने के बाद भी अपनी मर्जी से हिरासत में रखे." उन्होंने दावा किया कि नीरज सिंह को 7 तारीख को ही जमशेदपुर लाया जा चुका है, इसलिए उन्हें थाने में रखना अवैध हिरासत की श्रेणी में आता है.
24 घंटे के नियम और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 22 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस नीरज सिंह को उनकी पत्नी, परिजनों और उनके वकील तक से मिलने नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि "आरोपी को उसके कानूनी सलाहकार और परिवार से मिलने से रोकना उसके मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है." इस संबंध में उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के कई मार्गदर्शक फैसलों की प्रतियां भी कोर्ट को सौंपी हैं.
सीजेएम कोर्ट ने लिया संज्ञान
वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि इस गंभीर मामले में सीजेएम कोर्ट ने न्यायिक संज्ञान ले लिया है. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार (अभियोजन पक्ष) को दाखिल किए गए आवेदन की प्रति उपलब्ध करा दी है और इस पर जल्द ही अपना आदेश पारित करने की बात कही है. दूसरी ओर, नीरज सिंह के वकील द्वारा पुलिस की कार्यशैली पर लगाए गए इन संगीन आरोपों पर फिलहाल पुलिस प्रशासन या सरकारी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.