Jamshedpur News : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के खिलाफ हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक आनंद सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन उसकी भी एक मर्यादा होती है। किसी सार्वजनिक व्यक्ति की तस्वीर पर गुटखा थूकना, उसे पैरों से रौंदना और अश्लील भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक संस्कृति के अनुरूप नहीं है।
आनंद सिंह ने कहा कि सरयू राय के एक बयान को लेकर कुछ लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ अभद्र व्यवहार किया। उनका कहना है कि यदि किसी के विचारों से असहमति है तो उसका जवाब भी लोकतांत्रिक और शालीन तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध के नाम पर व्यक्तिगत अपमान लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन के समय प्रदर्शनकारियों के ही झुलसने की घटना यह दिखाती है कि ऐसे आंदोलनों में गंभीरता और तैयारी का अभाव भी दिखाई देता है।
सरयू राय के सार्वजनिक जीवन और जनहित के कार्यों का किया उल्लेख
आनंद सिंह ने अपने बयान में सरयू राय के लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें केवल चार बार के विधायक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरयू राय कई दशकों से जनहित, प्रशासनिक जवाबदेही, भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग 76 वर्ष की आयु में भी सरयू राय जनसंपर्क और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं तथा राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध हमेशा सौहार्दपूर्ण रहे हैं।
मीडिया की भूमिका की सराहना, मर्यादित विरोध की अपील
आनंद सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम में मीडिया की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि अधिकांश समाचार माध्यमों ने घटना की रिपोर्टिंग के दौरान संतुलित भाषा का प्रयोग किया और तथ्यों को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत विरोध में नहीं, बल्कि मर्यादित, जिम्मेदार और सभ्य विरोध में निहित है। राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत अपमान का रूप देना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं से लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक शालीनता बनाए रखने की अपील की।