Harmu River Rejuvenation Project: हरमू नदी पुनर्जीवन परियोजना में बकाया भुगतान को लेकर चल रहे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने ठेकेदार कंपनी मेसर्स ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाया है. अदालत ने झारखंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (JUIDCO) को निर्देश दिया है कि कंपनी के सभी स्वीकृत भुगतान 60 दिनों के भीतर जारी किए जाएं. यदि निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो उस पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने कंपनी की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया. सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) की अवधि 31 अक्टूबर 2023 को समाप्त हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद JUIDCO ने परियोजना का हैंडओवर नहीं लिया. इस वजह से ठेकेदार कंपनी को तय समय के बाद भी संचालन और रखरखाव का कार्य जारी रखना पड़ा.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 1 नवंबर 2023 से लेकर याचिका दायर किए जाने तक कंपनी ने जो ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का कार्य किया, उसका भुगतान भी किया जाए. अदालत ने करीब 16 महीने की इस अवधि का बकाया भी जारी करने का निर्देश दिया है.
वर्ष 2015 में मिला था परियोजना का ठेका
रिकॉर्ड के अनुसार, मेसर्स ईगल इंफ्रा इंडिया लिमिटेड को वर्ष 2015 में हरमू नदी पुनर्जीवन परियोजना का कार्य सौंपा गया था. कंपनी का कहना है कि निर्माण कार्य 31 अक्टूबर 2018 तक पूरा कर लिया गया था. इसके बाद पांच वर्ष की ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस अवधि भी 31 अक्टूबर 2023 को समाप्त हो गई.
कई मदों का भुगतान नहीं मिलने का लगाया था आरोप
कंपनी ने अदालत को बताया कि परियोजना पूरी होने के बावजूद JUIDCO ने अंतिम रनिंग अकाउंट बिल (R.A. Bill No. 29), ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का बकाया, बिजली बिल, हैंडओवर में देरी के दौरान किए गए अतिरिक्त कार्य का भुगतान और बैंक गारंटी जारी नहीं की. इसी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने JUIDCO को निर्देश दिया कि कंपनी के सभी स्वीकृत बकाया का भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए. साथ ही स्पष्ट किया कि समयसीमा के बाद भुगतान होने की स्थिति में 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा.