Jharkhand News : रांची में JAP-IT द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों के इंपैनलमेंट की चल रही टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। सेंटर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज यादव ने विभागीय सचिव को पत्र लिखकर टेंडर में शामिल कंपनियों के दस्तावेजों की गहन जांच कराने और जांच पूरी होने तक इंपैनलमेंट प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों ने फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र, गलत मानव संसाधन (मैनपावर) का विवरण और कथित रूप से संदिग्ध बैंक गारंटी के आधार पर टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि JAP-IT में पहले से इंपैनल रही कुछ कंपनियों पर आउटसोर्सिंग कर्मियों को समय पर भुगतान नहीं करने और नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूलने जैसे आरोप पहले भी लग चुके हैं, लेकिन अब तक इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
योग्य एजेंसियों को इंपैनल करने और स्थानीय कंपनियों को प्राथमिकता देने की मांग
पंकज यादव ने अपने पत्र में बेंगलुरु स्थित एप्टैड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड समेत बालाजी, एवरग्रीन, कमांडो सिक्योरिटी सर्विस, शिवा और अन्य कंपनियों के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कंपनियों और उनके निदेशकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सेंटर फॉर आरटीआई भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्य करने वाली संस्था है और उसकी विभिन्न शिकायतों एवं जनहित याचिकाओं पर सीबीआई, एसीबी, ईडी तथा आयकर विभाग जैसी एजेंसियां जांच कर रही हैं। उन्होंने मांग की कि केवल योग्य और विश्वसनीय एजेंसियों को ही इंपैनल किया जाए तथा झारखंड की स्थानीय एजेंसियों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि राज्य के युवाओं के हित सुरक्षित रह सकें। शिकायत में यह भी कहा गया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एजेंसियों का चयन होने से भविष्य में बड़े वित्तीय घोटालों की आशंका बढ़ सकती है, इसलिए सभी दस्तावेजों का पूरी सतर्कता के साथ सत्यापन कराया जाना चाहिए।