Jharkhand Health News: झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देने की दिशा में राज्य सरकार ने दो बड़े फैसले लिए हैं. एक ओर रिम्स को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान दिया गया है, वहीं दूसरी ओर रांची सदर अस्पताल में पहली बार अत्याधुनिक बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (BMT) यूनिट स्थापित करने की मंजूरी मिल गई है. सरकार का मानना है कि इन दोनों परियोजनाओं से गंभीर बीमारियों का इलाज राज्य में ही संभव होगा और मरीजों की दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी.
रिम्स में जांच से लेकर कैंसर स्क्रीनिंग तक होगी मजबूती
सरकार की ओर से स्वीकृत 100 करोड़ रुपये का इस्तेमाल केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा. इस राशि से रिम्स में आधुनिक मशीनें और जरूरी चिकित्सा उपकरण खरीदे जाएंगे. साथ ही मुख्यमंत्री निःशुल्क डायग्नोस्टिक एवं रेडियोलॉजी जांच योजना और निःशुल्क सर्वाइकल एवं ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग योजना को भी मजबूत किया जाएगा. उद्देश्य यह है कि मरीजों को कम समय में बेहतर जांच और इलाज की सुविधा मिल सके.
अब झारखंड में ही होगा बोन मैरो ट्रांसप्लांट
रांची सदर अस्पताल में बनने वाली बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट यूनिट राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यूनिट शुरू होने के बाद थैलेसीमिया, ब्लड कैंसर, ल्यूकेमिया, लिंफोमा और एप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, वेल्लोर या कोलकाता नहीं जाना पड़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलाज का खर्च भी घटेगा और मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा.
हर साल सैकड़ों मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, रांची सदर अस्पताल की क्लिनिकल हेमेटोलॉजी यूनिट में हर वर्ष 100 से 150 ल्यूकेमिया और लिंफोमा के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. पिछले दो वर्षों में 150 से 200 नए ब्लड कैंसर मरीज यहां आए, जिनमें कई को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी. नई यूनिट शुरू होने के बाद ऐसे मरीजों को राज्य से बाहर रेफर करने की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी.
13 करोड़ 45 लाख रुपये से तैयार होगी पूरी सुविधा
सरकार ने इस परियोजना के लिए 13 करोड़ 45 लाख रुपये मंजूर किए हैं. इसमें चार करोड़ रुपये विशेष भवन और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर खर्च होंगे. सात करोड़ रुपये अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों और लैब सिस्टम की खरीद पर लगाए जाएंगे. एक करोड़ रुपये कंज्यूमेबल्स की व्यवस्था के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि एक करोड़ रुपये उपकरणों के रखरखाव (सीएमसी) पर खर्च होंगे. शुरुआती चरण में डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए 45 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं. यूनिट के नियमित संचालन में लगने वाला मानव संसाधन खर्च आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा.
पारदर्शी खरीद और जल्द संचालन पर जोर
सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि सभी मशीनों और उपकरणों की खरीद GeM पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से की जाए. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि स्वीकृत परियोजनाएं तय समय के भीतर पूरी हों, ताकि मरीजों को जल्द से जल्द नई सुविधाओं का लाभ मिल सके.
स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी
रिम्स को मिली वित्तीय सहायता और सदर अस्पताल में बनने वाली बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट को झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि गंभीर और महंगे इलाज के लिए राज्य के लोगों को बाहर न जाना पड़े और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं झारखंड में ही उपलब्ध हों.