Jharkhand Health Department: झारखंड सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट (JR) और सीनियर रेजिडेंट (SR) को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब ये डॉक्टर किसी भी तरह की निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे. स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश जारी कर दिए हैं.
पहले हलफनामा, फिर मिलेगा मानदेय
सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है. अब सभी इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट को शपथ पत्र देना होगा. उन्हें लिखित रूप से बताना होगा कि वे किसी भी प्रकार की प्राइवेट प्रैक्टिस में शामिल नहीं हैं. हलफनामा जमा होने के बाद ही उनका मानदेय जारी किया जाएगा.
क्यों लिया गया यह फैसला?
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस कदम का मकसद सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना है. सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं. आरोप था कि कुछ रेजिडेंट डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में समय दे रहे थे. इसका असर अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर पड़ रहा था. इसी वजह से विभाग ने सख्ती करने का फैसला लिया.
धनबाद मेडिकल कॉलेज में शुरू हुआ पालन
धनबाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी इस आदेश को लागू कर दिया गया है. अस्पताल प्रशासन सभी इंटर्न, जेआर और एसआर से निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र भरवा रहा है. स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना हलफनामा दिए किसी का मानदेय जारी नहीं होगा.
नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
अस्पताल अधीक्षक डॉ. डी.के. गिन्दौरिया ने बताया कि सरकार के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सभी संबंधित डॉक्टरों से शपथ पत्र लिया जा रहा है. अगर कोई डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करते हुए पकड़ा जाता है या शपथ पत्र में गलत जानकारी देता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
मरीजों को क्या होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित होगी. मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा. साथ ही मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी. नियमों के पालन के लिए लगातार निगरानी भी की जाएगी.