धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिला मंत्रालय
राष्ट्रपति द्वारा पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी और वरिष्ठ अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली. शिक्षा मंत्रालय को देश के भविष्य और युवाओं से सीधे जुड़ा सबसे अहम मंत्रालय माना जाता है.
परीक्षा सुधार से लेकर नई शिक्षा नीति तक रहेगा फोकस
नई जिम्मेदारी के साथ प्रह्लाद जोशी के सामने कई बड़े मुद्दे हैं. इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति को तेजी से लागू करना. प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना. छात्रों का भरोसा मजबूत करना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना शामिल है. इसके अलावा स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने. उच्च शिक्षा संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा देने. डिजिटल शिक्षा का विस्तार करने और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है.
अनुभवी मंत्री से बढ़ीं शिक्षा क्षेत्र की उम्मीदें
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल हैं और पहले से उपभोक्ता मामले. खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का दायित्व संभाल रहे हैं. इससे पहले भी वह संसदीय कार्य. कोयला और खान जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके जोशी के पास लंबा प्रशासनिक और संसदीय अनुभव है. मंत्रालय में शुरुआती बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में परीक्षा सुधार. तकनीक आधारित मूल्यांकन. विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित मुद्दों पर फैसलों की रफ्तार तेज होने की उम्मीद की जा रही है.