Kulgam Terror Attack: दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक बार फिर से प्रवासी मजदूरों पर हमला किया है. शुक्रवार देर रात, ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे दो मजदूरों की पहचान पूछने के बाद आतंकवादियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे. हमले में एक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे ने शनिवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.
मृतकों की पहचान 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भूपेंद्र के रूप में हुई है. दोनों कुलगाम के केलाम इलाके स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम करते थे. स्थानीय लोगों के अनुसार, देर रात 10 से 12 राउंड गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने वारदात से पहले इलाके की रेकी की थी.
गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र को पहले अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. बाद में उनकी हालत बिगड़ने पर श्रीनगर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में रेफर किया गया, जहां शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने दोनों मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की. यह सहायता जिला प्रशासन की ओर से दी जाने वाली 6-6 लाख रुपये की तत्काल राहत से अलग होगी. मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है.
हमलावरों की तलाश में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. घटना के बाद सुरक्षा बलों ने केलाम इलाके की घेराबंदी कर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. अनंतनाग और कुलगाम में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं.
हाल के महीनों में प्रवासी मजदूरों पर हमले बढ़े हैं. यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, 2019 के बाद आतंकवादी संगठनों ने अपनी रणनीति बदलते हुए प्रवासी मजदूरों, ट्रक चालकों, छोटे कारोबारियों और बाहरी राज्यों से आए कर्मचारियों को निशाना बनाना शुरू किया है. अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गगनगीर स्थित एक निर्माण शिविर पर हुए हमले में भी कई बाहरी इंजीनियर और मजदूर मारे गए थे.
इन्हीं घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अब ट्रांजिट कॉरिडोर, औद्योगिक क्षेत्रों और बाहरी मजदूरों के कार्यस्थलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत कर रही हैं.