Ranchi News: नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में कबाड़ की बिक्री को लेकर कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. विश्वविद्यालय की ओर से पुराने कंप्यूटर, परीक्षा की कॉपियों और अन्य अनुपयोगी सामग्री की बिक्री को लेकर सरकार के स्तर पर शिकायत की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि करीब 40 लाख रुपये मूल्य का कबाड़ पांच ट्रकों में बाहर भेजा गया, जबकि इसके एवज में विश्वविद्यालय में महज 3.30 लाख रुपये का चेक या बैंक ड्राफ्ट जमा किया गया.
टेंडर के जरिए कबाड़ बेचने की प्रक्रिया शुरू हुई थी
शिकायत के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने टेंडर जारी कर पुराने कंप्यूटर, परीक्षा की पुरानी उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य कबाड़ सामग्री को बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी. इसके बाद सामग्री को पांच बड़े ट्रकों में लादकर विश्वविद्यालय परिसर से बाहर भेजे जाने का दावा किया गया है.
शिकायतकर्ता ने पांचों ट्रकों के नंबर भी उपलब्ध कराए हैं. इनमें UP67T-5644, BR02M-6063, BR02GAA-9511, BR02GAA-2827 और BR02AA-5898 शामिल हैं. आरोप है कि इन वाहनों के जरिए करीब 40 लाख रुपये मूल्य का कबाड़ बाहर भेजा गया, जबकि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में केवल 3.30 लाख रुपये जमा किए गए.
चेक और बैंक ड्राफ्ट की वैधता को लेकर भी सवाल
शिकायत में दावा किया गया है कि कबाड़ बिक्री से संबंधित फाइल के साथ चेक या बैंक ड्राफ्ट कुलपति कार्यालय में मौजूद है. शिकायतकर्ता ने भुगतान के दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए हैं. आरोप है कि कबाड़ की बिक्री को चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, जबकि सामान्य तौर पर बैंक चेक या ड्राफ्ट की वैधता तीन महीने होती है. ऐसे में भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति और उनकी वैधता की भी जांच की मांग की गई है.
बिक्री के लिए बनी समिति में शामिल थे डॉ. गौरव श्रीवास्तव
कबाड़ बिक्री की प्रक्रिया के लिए गठित समिति में डॉ. गौरव श्रीवास्तव भी सदस्य थे. उनके पास परीक्षा समन्वयक का अतिरिक्त प्रभार भी था. जानकारी के अनुसार, उन्होंने परीक्षा समन्वयक के पद से इस्तीफा दे दिया है.
फिलहाल कबाड़ की वास्तविक कीमत, बिक्री की प्रक्रिया और विश्वविद्यालय में जमा कराई गई राशि के बीच कथित अंतर की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कबाड़ की वास्तविक कीमत कितनी थी और बिक्री में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई या नहीं.