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  • 2026-09-07

Ranchi News: डिजिटल अरेस्ट केस में CBI की बड़ी कार्रवाई, पांच और गिरफ्तार; 28.86 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा

Ranchi News: डिजिटल अरेस्ट के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में CBI दिल्ली ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन नई गिरफ्तारियों के बाद मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या आठ हो गई है। जांच एजेंसी अब ठगी की रकम के लेनदेन, बैंक खातों और आरोपियों की भूमिका की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।


तीन पीड़ितों से करोड़ों की ठगी का खुलासा

CBI की जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने BITS Pilani से जुड़े एक व्यक्ति को करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने नियंत्रण में रखा। इस दौरान उससे करीब 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की गई। इसी तरह गुजरात के एक व्यक्ति से लगभग तीन महीने में 19.24 करोड़ रुपये और कर्नाटक के एक व्यक्ति से करीब एक महीने के दौरान 1.95 करोड़ रुपये ठगे गए। तीनों मामलों में ठगी की कुल रकम करीब 28.86 करोड़ रुपये बताई गई है।

20 राज्यों में 89 ठिकानों पर हुई छापेमारी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने इन मामलों की जांच अपने हाथ में ली। जांच आगे बढ़ने के बाद एजेंसी ने देश के 20 राज्यों में 89 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच की गई। इसी जांच के आधार पर पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।


बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर और निकासी

जांच में यह भी पता चला कि साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद इन खातों से पैसे निकाल लिए जाते थे। CBI के अनुसार, राज कर्मकार के बैंक खाते में करीब 1.5 करोड़ रुपये भेजे गए थे, जिसकी निकासी ज्योति रानी ने की थी। वहीं आकाश के बैंक खाते में करीब 1.95 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

APK के जरिए मोबाइल और बैंक खातों पर नियंत्रण का आरोप

CBI के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संकेत बस्तावर, पंकज बस्तावर, आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश यादव और शशांक सिंह के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार संकेत बस्तावर और पंकज बस्तावर ने ठगी की रकम हासिल करने के लिए बैंक खाते खुलवाए थे।

वहीं आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश यादव और शशांक सिंह पर आरोप है कि वे पीड़ितों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस में APK सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कराते थे। इसके जरिए कथित तौर पर डिवाइस और उससे जुड़े बैंक खातों का नियंत्रण हासिल किया जाता था। CBI मामले में आरोपियों की भूमिका और पैसों के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

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