JSSC-CGL Appointment Stay: JSSC-CGL के जरिए नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने उनकी नियुक्तियां रद्द करने वाले राज्य सरकार के आदेश के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने साफ कहा कि अधिसूचना से प्रभावित कर्मचारी फिलहाल अपनी नौकरी पर काम करते रहेंगे. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी.
तीन याचिकाओं पर आया फैसला
मामला विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत हुई नियुक्तियों से जुड़ा है. शालिनी सुंडी, रोजलिन श्वेता तिग्गा और ऋषिकेश सज्जन समेत अन्य नियुक्त कर्मचारियों ने सरकार के फैसले को चुनौती दी थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई थी. इसके बावजूद बिना नोटिस और पक्ष रखने का मौका दिए सेवाएं खत्म कर दी गईं.
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि नियमित नियुक्ति खत्म करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है. अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि सरकार की 18 अगस्त की अधिसूचना में इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार या सामग्री स्पष्ट रूप से नजर नहीं आ रही है.
इसी वजह से अधिसूचना संख्या 06/LO.S.A.-0107/5408 के अमल पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई गई है.
सरकार ने CID जांच का दिया हवाला
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने कोर्ट को बताया कि भर्ती में कथित गड़बड़ी की CID जांच चल रही है. इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं. सरकार का पक्ष था कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर नियुक्तियां रद्द करने का फैसला लिया गया. हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल सुविधा का संतुलन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में माना. अदालत ने कहा कि जब जांच पहले से जारी है, तो अधिसूचना पर तत्काल अमल करना उचित नहीं होगा.
नौकरी जारी रहेगी, लेकिन देनी होगी अंडरटेकिंग
कोर्ट ने राहत के साथ याचिकाकर्ताओं के लिए एक शर्त भी रखी है. उन्हें अंडरटेकिंग देनी होगी कि आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट का अंतिम फैसला उन्हें स्वीकार होगा. ट्रायल कोर्ट के फैसले के आधार पर सरकार कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई कर सकेगी.
22 परीक्षाओं पर भी लिया गया था फैसला
दरअसल, CID जांच के बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात कई भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर फैसले किए थे. कार्मिक विभाग की अधिसूचना के तहत 22 परीक्षाएं रद्द की गईं, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया रोकी गई और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया था. सरकार ने वर्ष 2014 से हुई विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ी की जांच की भी घोषणा की थी.