Ranchi News: हरमू स्थित झामुमो के केंद्रीय कार्यालय में गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह विधायक लुईस मरांडी और तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने मध्य प्रदेश में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर भाजपा सरकार को घेरा.
लुईस मरांडी ने कहा कि मध्य प्रदेश के बालाघाट में पिछले करीब एक महीने के दौरान बैगा और गोंड आदिवासी समाज के 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बच्चों के इलाज को लेकर समय पर गंभीरता नहीं दिखाई. उन्होंने यह भी कहा कि मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे. उनके अनुसार, समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी.
आदिवासी समाज की अनदेखी का लगाया आरोप
लुईस मरांडी ने भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन के अधिकार के साथ शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग करता है, लेकिन उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने मध्य प्रदेश में आदिवासियों के साथ हुई कई घटनाओं का भी उल्लेख किया. आदिवासी युवक के साथ पेशाब करने, एक युवक को गाड़ी के पीछे बांधकर घसीटने और महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने इन मामलों को गंभीर बताया और कार्रवाई की मांग की.
25 लाख रुपये मुआवजे की मांग
वहीं, सुदीप गुड़िया ने कहा कि आदिवासी आश्रमों में बच्चों की मौत सरकार की बड़ी लापरवाही को दर्शाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों के आदिवासी होने के कारण उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया.
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के बाद सरकार सक्रिय हुई और मामले में हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा. सुदीप गुड़िया ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की.
सुदीप गुड़िया ने मृत बच्चों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग करते हुए आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई.
दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार की MMDR नीति में बदलाव का विरोध भी किया. उनका कहना था कि खनिज संपदा वाले आदिवासी क्षेत्रों में इस तरह की नीतियों का असर स्थानीय लोगों पर पड़ सकता है और उनके अधिकार कमजोर हो सकते हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों नेताओं ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वह आदिवासी समाज के अधिकार और विकास के लिए काम कर रहे हैं.