Anil Ambani CBI Case: रिलायंस कैपिटल से जुड़े एक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज किया है. मामले में कंपनी के पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, पूर्व समूह प्रबंध निदेशक सतीश सेठ, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है. न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, मामला भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के निवेश से जुड़ी कथित धोखाधड़ी का है. इसमें LIC को 2,684 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आरोप लगाया गया है.
अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने आरोपों से किया इनकार
अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने CBI की FIR में लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. प्रवक्ता ने कहा कि यह FIR रिलायंस कैपिटल लिमिटेड से संबंधित है. अनिल अंबानी 2005 से नवंबर 2021 तक कंपनी के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक और चेयरमैन रहे. बयान के मुताबिक, नवंबर 2021 में RBI ने कंपनी के बोर्ड को हटा दिया था. इसके बाद कंपनी में एक प्रशासक नियुक्त किया गया था. प्रवक्ता ने कहा कि अनिल अंबानी ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. उन्होंने कानून के तहत अपने सभी अधिकार सुरक्षित रखे हैं.
LIC ने 5 डिबेंचर में किया था निवेश
CBI के अनुसार, LIC ने 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच रिलायंस कैपिटल की ओर से जारी पांच अपरिवर्तनीय डिबेंचर खरीदे थे. इनकी कुल कीमत करीब 3,900 करोड़ रुपये थी. LIC के मुताबिक, यह निवेश कंपनी की सामान्य जरूरतों, फंड की आवश्यकता और पुराने कर्ज को री-फाइनेंस करने के लिए किया गया था.
फंड को दूसरी जगह भेजने का आरोप
LIC ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश रची. आरोप है कि गलत जानकारी देकर LIC को कंपनी में निवेश के लिए राजी किया गया. इसके बाद निवेश की रकम को कथित तौर पर दूसरे खातों में भेज दिया गया. LIC ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, फंड के गलत इस्तेमाल और खातों में हेराफेरी जैसे आरोप लगाए हैं. इन कथित गतिविधियों के कारण LIC को 2,684 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का आरोप है.
CBI पहले भी दर्ज कर चुकी है कई केस
CBI के मुताबिक, सरकारी बैंकों, EPFO और LIC से मिली शिकायतों के आधार पर एजेंसी पहले भी रिलायंस समूह की अलग-अलग कंपनियों से जुड़े आठ केस दर्ज कर चुकी है. इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम शामिल हैं. CBI के अनुसार, इन मामलों में अब तक छह आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. एजेंसी ने बताया कि मामलों की जांच अभी जारी है. इन मामलों की निगरानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है.