Ranchi: झारखंड पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने माओवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी का दावा किया है। अधिकारियों के अनुसार, राज्य में माओवादियों की कमर लगभग टूट चुकी है और अब महज 130 माओवादी ही झारखंड में सक्रिय हैं। सरकार और सुरक्षा बलों का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक शेष माओवादियों का भी पूरी तरह से सफाया कर दिया जाए।
सारंडा बना आखिरी ठिकाना
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में सबसे ज्यादा करीब 75 माओवादी अभी भी छिपे हुए हैं। इसके अलावा बोकारो, लातेहार, चतरा, लोहरदगा और पलामू जिलों में कुल 24 माओवादी सक्रिय हैं।
माओवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर 6
कभी राज्य के 19 जिले माओवाद से बुरी तरह प्रभावित थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर केवल 6 जिलों तक सीमित रह गई है। यही नहीं, भाकपा माओवादी के अलावा अन्य संगठनों जैसे टीएसपीसी, पीएलएफआई और जेजेएमपी की सक्रियता भी बेहद सीमित रह गई है। कई अन्य माओवादी संगठनों का तो पूरी तरह सफाया हो चुका है।
भारी इनाम और हालिया मुठभेड़ें
हाल के चार महीनों में सुरक्षा बलों की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने माओवादियों के हौसले पस्त कर दिए हैं।
- 21 अप्रैल को बोकारो के लुगू पहाड़ पर मुठभेड़ में 1 करोड़ के इनामी प्रयाग मांझी उर्फ विवेक समेत 8 माओवादी मारे गए।
- 16 जुलाई को बोकारो के गोमिया क्षेत्र में 5 लाख के इनामी कुंवर मांझी उर्फ सहदेव मांझी सहित दो माओवादी ढेर हुए।
- 26 जुलाई को गुमला-लोहरदगा सीमा पर जेजेएमपी के दो माओवादी मुठभेड़ में मारे गए।
35 लाख रुपये बरामद, हथियार भी जब्त
सारंडा क्षेत्र में माओवादियों के हथियार और विस्फोटक खरीद के लिए छिपाकर रखे गए 35 लाख रुपये भी सुरक्षा बलों ने बरामद किए हैं। इसके अलावा भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद भी जब्त किया गया है।
जिलावार माओवादी उपस्थिति का लेखा-जोखा
- भाकपा माओवादी: पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, लातेहार, चतरा, लोहरदगा, पलामू
- टीएसपीसी: पलामू व चतरा सीमा क्षेत्र, सक्रिय संख्या लगभग 10
- जेजेएमपी: लोहरदगा और गुमला सीमावर्ती क्षेत्र, संख्या 15
- पीएलएफआई: खूंटी-गुमला क्षेत्र में इक्का-दुक्का सदस्य, नेतृत्व कर रहा है मार्टिन केरकेट्टा
झारखंड सरकार और सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि मार्च 2026 तक राज्य को माओवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा।