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  • 2025-08-11

Chirudih Sohrai Art: चिरूडीह जहां दीवारें बोलती हैं सोहराई कला की भाषा, और महिलाएं रंगों से लिख रही हैं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

सरायकेला : तमाड़ विधानसभा क्षेत्र के छोटे से चिरूडीह गांव ने अपनी अलग पहचान बना ली है। इस गांव को एक अनोखा कलात्मक स्वरूप देने का श्रेय जाता है मनीष महतो को, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और कला के प्रति प्रेम से यहां की तस्वीर ही बदल दी है।

मनीष महतो ने न सिर्फ खुद सोहराई पेंटिंग की बारीकियां सीखी और अपनाई, बल्कि गांव की महिलाओं और बच्चियों को भी यह पारंपरिक कला मुफ्त में सिखाई। उनके इस प्रयास का नतीजा यह हुआ कि आज चिरूडीह गांव का हर घर रंग-बिरंगी सोहराई पेंटिंग से सजा हुआ है, जो दूर-दूर से आने वाले लोगों का ध्यान खींच लेता है।

सोहराई पेंटिंग, जो झारखंड की प्राचीन लोक कला और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, अब इस गांव की पहचान बन चुकी है। इससे न केवल गांव की सांस्कृतिक छवि निखरी है, बल्कि यहां की महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। कई महिलाएं अब अपनी बनाई पेंटिंग्स और डिज़ाइन बेचकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

मनीष महतो का कहना है कि यह कला सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पहचान का प्रतीक है। उन्होंने झारखंड सरकार से आग्रह किया है कि सोहराई पेंटिंग और अन्य पारंपरिक कलाओं के संरक्षण व प्रोत्साहन के लिए आवश्यक सहायता प्रदान की जाए, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रह सके।

आज चिरूडीह एक कलात्मक गांव के रूप में जाना जाता है, जहां दीवारें भी बोलती हैं—रंगों, आकृतियों और परंपरा की भाषा में। यह सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
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