पुस्तक की जानकारी
यह विमोचन विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस एंड टेक्नोलॉजी नामक पुस्तक के हिंदी अनुवाद का था, जिसे प्रोफेसर डॉ. बी. कुमार और सुजय कुमार द्वारा लिखा गया है। इस पुस्तक को खन्ना पब्लिकेशन, नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है। यह पुस्तक न केवल छात्रों के लिए ई-बुक के रूप में उपलब्ध है, बल्कि गूगल और नेट एडिशन पर भी इसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद विद्युत वरण महतो थे। उनके साथ टाटा स्टील के इंजीनियर विवेक सिंह, कंप्यूटर इंजीनियर शुभम कुमार और इंद्रजीत कुमार भी इस लोकार्पण समारोह में उपस्थित थे।
अपने संबोधन में, सांसद महतो ने इस प्रयास की सराहना की और आशा व्यक्त की कि यह हिंदी अनुवाद हिंदी भाषी छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा में भाषा की बाधा को दूर करना बहुत आवश्यक है, और इस तरह के प्रयास छात्रों को उनके मूल भाषा में सीखने और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी विषयों का भी हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
आदित्य इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इस कदम को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह पहल उन लाखों छात्रों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है, जो अंग्रेजी भाषा की कठिनाई के कारण तकनीकी विषयों को समझने में चुनौतियों का सामना करते हैं।
अतिथियों के विचार
इस मौके पर, टाटा स्टील के इंजीनियर विवेक सिंह ने कहा कि इंजीनियरिंग और तकनीकी विषयों में हिंदी में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपलब्ध होना एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे विषय को और गहराई से समझ पाएंगे।
कंप्यूटर इंजीनियर शुभम कुमार ने बताया खास बात
डिजिटलाइजेशन के इस दौर में, ई-बुक्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर हिंदी अनुवाद का उपलब्ध होना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्र भी आसानी से इन संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे।
यह समारोह हिंदी भाषा के महत्व और तकनीकी शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक सशक्त संदेश देता है। आदित्य इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का यह प्रयास निश्चित रूप से देश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखेगा।
आदित्य इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के पहल का लाभ
आदित्य इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, आदित्यपुर का यह कदम तकनीकी शिक्षा को हिंदी भाषी छात्रों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह पहल यह दर्शाती है कि भाषा शिक्षा के मार्ग में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे एक सशक्त माध्यम के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए।