India And United Kingdom Relationship: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर बुधवार को मुंबई पहुंचे. इस यात्रा से पहले ही उन्होंने विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटेन भारत के लिए वीजा नियमों में किसी तरह की ढील नहीं देगा. इस बयान ने उन लाखों भारतीय छात्रों और पेशेवरों की उम्मीदों को झटका दिया है जो ब्रिटेन में पढ़ाई या नौकरी के अवसर तलाश रहे हैं.
स्टार्मर इस दौरे पर भारत के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते पर चर्चा करने आए हैं. उनके साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत पहुंचा है जिसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधि, राजनीतिक नेता और कई ब्रिटिश विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर शामिल हैं. इस यात्रा का उद्देश्य ब्रिटेन में निवेश बढ़ाना और सुस्त पड़ी ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को नई गति देना बताया जा रहा है.
हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के अच्छे अवसर मौजूद हैं, लेकिन साफ कर दिया कि भारतीय कर्मचारियों या छात्रों के लिए नए वीजा रास्ते खोलने की कोई योजना नहीं है. उनके अनुसार, यह विषय वीजा का नहीं बल्कि व्यापार, निवेश, नौकरियों और ब्रिटेन की समृद्धि से जुड़ा है.
भारत में ब्रिटिश कारों और व्हिस्की सस्ते दाम में होंगे निर्यात
भारत और ब्रिटेन के बीच कई वर्षों की बातचीत के बाद जुलाई 2025 में व्यापार समझौता संपन्न हुआ था. इस समझौते के तहत ब्रिटिश कारों और व्हिस्की को भारत में सस्ते दाम पर निर्यात किया जा सकेगा, वहीं भारतीय वस्त्र और आभूषण ब्रिटेन में अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर बिक सकेंगे. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार अरबों पाउंड बढ़ने की संभावना है.
इस समझौते में भारतीय कर्मचारियों को तीन साल के लिए सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट तो दी गई है, लेकिन ब्रिटेन की इमिग्रेशन नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया. स्टार्मर की लेबर पार्टी की सरकार पहले से ही वीजा नियमों को सख्त बना रही है. हाल ही में हुए पार्टी सम्मेलन में उन्होंने सैटलमेंट स्टेटस को लेकर भी कड़ी नीति की घोषणा की थी.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला भारत सहित सभी देशों के लिए वीजा नीति को कठिन बनाएगा. अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों की माने तो यह भारतीयों के लिए निराशाजनक खबर है क्योंकि ब्रिटेन लगातार अपने वीजा नियमों को कठोर कर रहा है. उनका कहना है कि अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा नियमों को सख्त करने के बाद भारतीय उम्मीद कर रहे थे कि ब्रिटेन इस दिशा में राहत देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
इमिग्रेशन नियमों में ढील फिलहाल संभव नहीं
ब्रिटेन में भी कई कंपनियां लंबे समय से सरकार से यह मांग कर रही थीं कि प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए इमिग्रेशन नियमों में कुछ ढील दी जाए. मगर स्टार्मर का यह ताजा बयान स्पष्ट करता है कि फिलहाल ऐसा होने की संभावना नहीं है. ब्रिटेन में इमिग्रेशन हमेशा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है और वहां की जनता सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग करती रही है.
हालांकि अंतरराष्ट्रीय मामलों के कई विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टार्मर की यह यात्रा मुख्य रूप से व्यापार समझौते को मजबूत करने पर केंद्रित है और वीजा इसमें शामिल मुद्दा नहीं है. उनके अनुसार, आने वाले चरणों में इस पर बातचीत हो सकती है और भारत को कुछ राहत भी मिल सकती है, इसलिए इस बयान को लेकर अत्यधिक निराश होने की जरूरत नहीं है.
स्टार्मर की यात्रा से एक दिन पहले व्लादिमीर पुतिन को नरेंद्र मोदी ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं
इमिग्रेशन के साथ-साथ इस यात्रा के दौरान एक और संवेदनशील विषय रूस से तेल खरीदने का भी हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्मर की यात्रा से एक दिन पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी थीं. इस पर पूछे गए सवाल पर स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने पुतिन को बधाई नहीं दी और ऐसा करने का उनका कोई इरादा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन रूस की शैडो फ्लीट, यानी उन जहाजों के नेटवर्क, पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचकर तेल की बिक्री करते हैं.
अमेरिका ने हाल ही में भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ब्रिटेन पर भी अमेरिका का दबाव होगा कि वह भारत के साथ इसी तरह का रवैया अपनाए. यह संभव है कि अमेरिका ब्रिटेन और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाए ताकि वे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ती करें. हालांकि यह उन देशों पर निर्भर करेगा कि वे अमेरिकी दबाव को कितना मानते हैं.
ब्रिटेन के साथ भारत का व्यापारिक समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी
कई विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका भारत पर जो टैरिफ लगा रहा है, वह वास्तव में दबाव की रणनीति है ताकि वह भारत से अन्य व्यापारिक छूटें प्राप्त कर सके. वहीं ब्रिटेन पर इसका अधिक असर नहीं पड़ेगा क्योंकि भारत और ब्रिटेन के बीच पहले ही मजबूत व्यापारिक समझौता हो चुका है. विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटेन के साथ भारत का व्यापारिक समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी है. ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 6.5 अरब डॉलर का फायदा होगा जबकि भारत को ब्रिटिश बाजार में अधिक पहुंच मिलेगी. हालांकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और उसके साथ व्यापारिक मतभेदों की भरपाई ब्रिटेन से नहीं की जा सकती.
भारतीय वस्त्र व आभूषण ब्रिटेन में अधिक किफायती दाम पर मिलेंगे
ब्रिटेन भारत के लिए एक तैयार बाजार है. पिछले कुछ वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक और टेक्सटाइल निर्यात ब्रिटेन में तेजी से बढ़ा है. वहीं इस समझौते से ब्रिटिश व्हिस्की पर टैरिफ 150 प्रतिशत से घटकर 75 प्रतिशत और 2035 तक 40 प्रतिशत तक लाने का प्रावधान किया गया है. इससे ब्रिटिश उत्पाद भारत में सस्ते होंगे और भारतीय वस्त्र व आभूषण ब्रिटेन में अधिक किफायती दाम पर मिलेंगे.
ब्रेक्सिट के बाद यह ब्रिटेन का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापारिक समझौता है. ब्रिटिश सरकार का दावा है कि इससे उनकी अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी. वहीं भारत ने 2030 तक अपने निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें ब्रिटेन एक महत्वपूर्ण भागीदार होगा.
हालांकि किएर स्टार्मर के वीजा संबंधी बयान ने इस ऐतिहासिक समझौते की चमक को कुछ हद तक फीका कर दिया है. फिलहाल भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए यह एक निराशाजनक संकेत है, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध यह दिखाते हैं कि भविष्य में संवाद के द्वार अभी बंद नहीं हुए हैं.