Ratan Tata Death Anniversary: जमशेदपुर आज सर रतन टाटा को याद कर रहा है, जिनका नाम सिर्फ उद्योग नहीं, बल्कि ईमानदारी, सादगी और भारतीयता की पहचान बन गया. आज उनकी पहली पुण्यतिथि है. 9 अक्टूबर 2024 को 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ था. उनके जाने के बाद टाटा समूह में कई बड़े बदलाव हुए, लेकिन उनकी छवि आज भी हर कर्मचारी, हर भारतीय के दिल में जिंदा है.
28 दिसंबर 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर जन्मे रतन टाटा, टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा के परपोते थे. बचपन में माता-पिता के अलग हो जाने के बाद उनकी परवरिश दादी ने की. विदेश में पढ़ाई के बाद जब वो भारत लौटे, तो टाटा स्टील में मजदूरों के साथ काम करके अपनी यात्रा की शुरुआत की.
रतन टाटा ने टाटा समूह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, भारतीय उद्योग जगत को नई दिशा दी और देशभर के स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने का मौका दिया. उन्होंने पेटीएम, ओला जैसी 40 से अधिक कंपनियों में निवेश किया, जिनमें से 18 आज भारतीय उद्योग जगत की रीढ़ हैं.
जमशेदपुर रतन टाटा के दिल के बेहद करीब था. वे इसे अपना दूसरा घर मानते थे. यही शहर था जहां टाटा समूह की नींव पड़ी, और भारत के औद्योगिक विकास की शुरुआत हुई. एशिया के पहले स्टील प्लांट से लेकर आधुनिक भारत की औद्योगिक पहचान तक, टाटा और जमशेदपुर एक-दूसरे के पर्याय बन गए.
आज जब पूरा शहर और देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि रतन टाटा सिर्फ एक उद्योगपति नहीं थे, बल्कि वे उस सोच का प्रतीक थे जिसने भारत को आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और सामाजिक जिम्मेदारी का अर्थ सिखाया.