Jharkhand News: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली झारखंड तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 (नियमित एवं बैकलॉग) को अचानक स्थगित कर दिया गया है. यह परीक्षा 9 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2025 के बीच आयोजित होने वाली थी, लेकिन आयोग ने अपरिहार्य तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए इसे टाल दिया.
आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि नई तिथियों की घोषणा जल्द की जाएगी. हालांकि, इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश और निराशा फैल गई है, क्योंकि कई उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों तक पहुंच चुके थे. दूर-दराज जिलों से आए विद्यार्थी होटलों और छात्रावासों में रुके हुए थे. अचानक परीक्षा स्थगित होने की खबर ने उनके आर्थिक और मानसिक संकट को और गहरा कर दिया.
तकनीकी कारणों की वजह से परीक्षा स्थगित: आयोग
जेएसएससी ने आधिकारिक सूचना में लिखा है कि 9 से 16 अक्टूबर के बीच होने वाली परीक्षा को तकनीकी कारणों से तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है. नई तिथि जल्द प्रकाशित की जाएगी.
विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस निर्णय ने राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने लिखा कि युवाओं के साथ फिर विश्वासघात हुआ है. मरांडी ने सवाल उठाया कि तकनीकी खामी का हवाला केवल एक बहाना है या वास्तव में कोई गंभीर समस्या थी. उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा में पहुंचे अभ्यर्थियों का आने-जाने का खर्च वहन किया जाए और पारदर्शी तरीके से जल्द परीक्षा कराई जाए.
पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास ने भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने लिखा कि रातों-रात परीक्षा स्थगित कर सरकार ने एक बार फिर छात्रों के सपनों से खिलवाड़ किया है. दास ने कहा कि युवाओं की उम्र निकल रही है और सरकार एक परीक्षा तक समय पर कराने में नाकाम है.
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भी अभ्यर्थियों के पक्ष में आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी अपने केंद्र वाले शहरों में पहुंच चुके थे और उसी समय परीक्षा रोकना सीधे-सीधे उनके सपनों पर प्रहार है. उन्होंने सवाल किया कि अगर आयोग परीक्षा आयोजित करने में सक्षम नहीं था, तो पहले ही सूचना क्यों नहीं दी गई.
अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर फिरा पानी
यह पहली बार नहीं है जब जेएसएससी की परीक्षा विवादों में आई है. अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से तैयारी कर रहे हैं और बार-बार परीक्षाएं रद्द या स्थगित होने से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है. कई छात्रों ने कहा कि यात्रा खर्च, ठहरने का खर्च और मानसिक दबाव का कोई हिसाब सरकार नहीं समझ रही.
अब सभी की निगाहें जेएसएससी और सरकार की ओर हैं कि परीक्षा की नई तिथि कब घोषित की जाएगी और क्या इस बार परीक्षा बिना किसी विवाद के पूरी हो पाएगी. झारखंड के युवा एक स्थिर और भरोसेमंद भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी वर्षों की मेहनत मिट्टी में न मिले.