Ghatshila By-Election: घाटशिला विधानसभा उपचुनाव झारखंड की राजनीति में नया मोड़ ले रहा है. जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली इस सीट पर झामुमो को अपने ही घर में कलह से जूझना पड़ रहा है. अब तक माना जा रहा था कि दिवंगत पूर्व मंत्री रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन को टिकट दिया जाएगा, लेकिन हालात बदल चुके हैं. पार्टी के भीतर विक्टर सोरेन, जो रामदास सोरेन के भतीजे हैं, खुलकर नाराजगी जता चुके हैं और खुद को असली उत्तराधिकारी बता रहे हैं.
विक्टर का दावा है कि वे ही रामदास सोरेन के राजनीतिक कामकाज में सक्रिय रहे हैं और टिकट उन्हीं का हक है. यह भी चर्चा है कि वे जेकेएलकेएम से संपर्क में हैं और टिकट न मिलने पर बगावत कर सकते हैं. यही वजह है कि झामुमो नेतृत्व असहज महसूस कर रहा है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटा है.
सूत्र बताते हैं कि पारिवारिक विवाद के कारण ही पहले भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमेश को मंत्री पद से दूर रखा था. झामुमो की बैठक में पहले सोमेश का टिकट तय माना जा रहा था, लेकिन अब विवाद से बचने के लिए पार्टी रामदास सोरेन की पत्नी सूर्यमणी सोरेन को उम्मीदवार बना सकती है. इससे बेटे और भतीजे के बीच की जंग को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है.
विक्टर सोरेन के एक सोशल मीडिया पोस्ट को खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा रीट्वीट करने से अटकलें और तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि झामुमो किसी भी जोखिम से बचना चाहती है, क्योंकि विक्टर के बगावती तेवर भाजपा को फायदा पहुंचा सकते हैं. भाजपा की ओर से इस बार भी बाबूलाल सोरेन को मैदान में उतारने की संभावना है, जो पिछले चुनाव के बाद से इलाके में सक्रिय हैं.
2024 चुनाव में रामदास सोरेन को 51.5 फीसदी वोट मिले थे, जबकि भाजपा के बाबूलाल सोरेन को 39.8 फीसदी. जेकेएलकेएम तीसरे स्थान पर रही थी और अब वही पार्टी स्थिति पर नजर रखे हुए है. टिकट को लेकर मचे इस संग्राम ने घाटशिला की लड़ाई को और रोमांचक बना दिया है. झामुमो के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती है कि वह घर के मतभेदों को थामकर सीट बचा सके.