Jamshedpur: झारखंड जेल प्रशासन ने हाल ही में एक बहुत ही गंभीर निर्णय लिया है। जिसमें अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक कुख्यात गैंगस्टर सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह जिसे अजरबैजान से प्रत्यर्पित (Extradition) करके भारत लाया गया। अब उसे रामगढ़ जेल से जमशेदपुर के घाघीडीह केंद्रीय कारागार में शिफ्ट किया जाएगा। यह स्थानांतरण मयंक सिंह की सुरक्षा और उसके जेल के अंदर से चलने वाले संभावित गैंग ऑपरेशन को रोकने के लिए किया जा रहा है।
कुख्यात सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और स्थानीय गैंगस्टर अमन साहू गैंग का एक अहम गुर्गा है। वह विदेश से गिरफ्तार होकर भारत लाया जाने वाला झारखंड का पहला अपराधी है।
रामगढ़ जेल में बंद इस अपराधी की सुरक्षा को लेकर रामगढ़ जेल प्रशासन को गंभीर आशंकाएं थीं। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने उसे अति सुरक्षित घाघीडीह जेल में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी, जिसे जेल आईजी ने तुरंत मंजूरी दे दी।
गंभीर मामले दर्ज
मयंक सिंह पर हजारीबाग जिले में जबरन वसूली के कई मामले दर्ज हैं। वह विदेश में रहते हुए भी अपने गुर्गों के ज़रिए स्थानीय कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलता था। उस पर IPC की धारा 385 और 387 (जबरन वसूली) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस जांच जारी
बड़कागांव, उरीमारी और डाड़ीकला ओपी में उसके खिलाफ सात से अधिक मामलों की पुलिस जांच जारी है।
झारखंड जेल प्रशासन का यह कदम यह साफ दिखाता है कि अब राज्य किसी भी कीमत पर गैंगस्टरों को जेल के अंदर से अपना नेटवर्क चलाने नहीं देगा।
आगे क्या कदम ज़रूरी हैं?
अति सुरक्षित जेल में शिफ्ट करना एक अहम कदम है, लेकिन जबरन वसूली के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रशासन को दो और सख्त और आधुनिक कदम उठाने चाहिए
1. स्मार्ट निगरानी सिस्टम
जेल में हर कोने पर हाई-टेक CCTV कैमरे, सिग्नल जैमर और मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएं ताकि कोई भी कैदी बाहरी संपर्क न कर सके। इससे गैंग के संचालन पर तुरंत रोक लगेगी।
2. स्पेशल इंटेलिजेंस टीम
एक खास जांच टीम बनाई जाए जो कैदियों के बीच हो रही बातचीत और गतिविधियों पर नज़र रखे। यह टीम समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करे ताकि किसी भी साजिश को शुरू होने से पहले ही रोका जा सके।
इन कदमों से जेल के भीतर से चलने वाले अपराधी नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सकता है और कानून-व्यवस्था और भी मजबूत होगी।