Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे का गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है. मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को महागठबंधन में 15 सीटें मिल गई हैं. लंबे समय से चली आ रही असहमति तब दूर हुई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीधे हस्तक्षेप कर बातचीत को अंजाम तक पहुंचाया. सीटों की संख्या कम होने की भरपाई के लिए राजद ने वीआईपी को एक राज्यसभा और दो विधान परिषद (एमएलसी) सीटों का वादा भी किया है.
वीआईपी ने शुरू की उम्मीदवारों की घोषणा
समझौते के बाद वीआईपी ने देर रात दो उम्मीदवारों की घोषणा की. पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी खुद दरभंगा जिले की गौड़ा बौराम सीट से मैदान में उतरेंगे. वहीं प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद भभुआ सीट से चुनाव लड़ेंगे. दोनों उम्मीदवार शुक्रवार को अपना पर्चा दाखिल करेंगे, क्योंकि यह पहले चरण के नामांकन का अंतिम दिन है.
कैसे सुलझा सीट बंटवारे का विवाद
मुकेश सहनी पहले अधिक सीटों की मांग पर अड़े थे, जिस कारण महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग फॉर्मूला टलता जा रहा था. सहनी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का ऐलान भी किया था, जिसे कई बार टाला गया. इसी बीच राहुल गांधी ने सहनी से फोन पर बात की और उन्हें समझौते के लिए तैयार किया. इसके बाद सीटें फाइनल की गईं और वीआईपी ने अपने उम्मीदवारों को सिंबल सौंपना शुरू कर दिया.
गौड़ा बौराम सीट फिर चर्चा में
गौड़ा बौराम सीट मुकेश सहनी के लिए खास महत्व रखती है. वर्ष 2020 में वीआईपी ने यह सीट जीती थी, लेकिन जीतने वाली विधायक स्वर्णा सिंह बाद में भाजपा में शामिल हो गई थीं. इस चुनाव में भाजपा ने स्वर्णा सिंह का टिकट काटकर सुजीत कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है.
राजनीतिक विश्लेषण
वीआईपी को 15 सीटें मिलना महागठबंधन के लिए रणनीतिक कदम माना जा रहा है. भले ही संख्या कम हो, लेकिन राज्यसभा और एमएलसी का ऑफर देकर राजद ने वीआईपी को साथ बनाए रखने की कोशिश की है. यह समझौता संकेत देता है कि महागठबंधन छोटे सहयोगियों के महत्व को समझते हुए आगे बढ़ना चाहता है. वहीं मुकेश सहनी अब अपने कोर वोटबैंक जो निषाद और मल्लाह समुदाय हैं, को साधते हुए महागठबंधन में अपनी उपयोगिता साबित करने की कोशिश करेंगे. आगामी चरणों में यह देखना अहम होगा कि वीआईपी इन 15 सीटों पर कितनी प्रभावी चुनौती पेश कर पाती है.