सूत्रों के अनुसार, तस्कर ओडिशा के अंदरूनी इलाकों में खेत किराए पर लेकर गांजा की खेती करते हैं। कटाई के बाद इसे स्थानीय स्तर पर छोटे ट्रकों और पिकअप वैन में भरकर पहले मलकानगिरी या कोरापुट जैसे हब तक पहुंचाया जाता है। वहां से माल जमशेदपुर के माध्यम से ट्रेनों और कंटेनर ट्रकों में छिपाकर उत्तर भारत के शहरों तक भेजा जाता है। सबसे उत्तम क्वालिटी के लिए मशहूर है। इसकी मांग ज्यादा है। यह इलाका आंध्र प्रदेश की सीमा से सटा है, जिससे तस्करों को लाभ मिलता है।
चित्रकोंडा के गांजे की डिमांड अधिक
पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, चित्रकोंडा का कटऑफ एरिया गांजा अवैध नेटवर्क से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं तस्कर, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताय बताया कि ओडिशा के नक्सल प्रभावित इलाकों में यह अवैध कारोबार स्थानीय लोगों के लिए आजीविका का माध्यम बन चुका है। वहीं, तस्कर इस अवैध नेटवर्क से करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमाई जिलों में निगरानी और खुफिया नेटवर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि इस जड़ से फैलते गांजा तस्करी के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
हर राज्य में हैं पैडलर
तस्करी का यह कारोबार इतना संगठित है कि हर राज्य में इसके लिए स्थानीय स्तर पर पैडलर, एजेंट, कैरियर और सप्लायर तैनात रहते हैं। पुलिस सूत्र बताते हैं कि दूरी के साथ गांजा का दाम भी बढ़ता जाता है। जहां जमशेदपुर में एक किलो गांजा की कीमत 10 से 12 हजार रुपये के बीच होती है, वहीं नोएडा या दिल्ली में यही कीमत दोगुनी या उससे अधिक हो जाती है।
पुलिस का विशेष अभियान कोल्हान में चलाया जा रहा है। हाल में भारी मात्रा में में गांजा बरामद किया गया है। सरायकेला में तो अफीम को टारगेट कर पूरी खेती नष्ट की गई है। - अनुरंजन किस्पोट्टा, डीआईजी, कोल्हान