Diwali Sales: देश भर के कारोबारियों के लिए दिवाली हमेशा से उत्सव से बढ़कर आर्थिक अवसर लेकर आती है. इस साल का त्योहार कारोबारियों के लिए खुशियों की सौगात बन गया जब देश में दिवाली की बिक्री ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. कंफेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक इस बार दिवाली पर 6.05 लाख करोड़ रुपए की बिक्री हुई जो एक ऐतिहासिक आंकड़ा है. इसमें 5.40 लाख करोड़ रुपए की बिक्री सामानों की और 65 हजार करोड़ रुपए सर्विसेज से आई. पिछले साल की तुलना में इस बार बिक्री में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
पिछले साल दिवाली पर 4.25 लाख करोड़ रुपए की बिक्री हुई थी जबकि इस बार यह आंकड़ा 6 लाख करोड़ रुपए के पार चला गया. इसके पीछे कई कारण रहे जिनमें जीएसटी दरों में कटौती, रेपो रेट में कमी और सबसे बड़ा फैक्टर स्वदेशी उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी रहा.
देश में “वोकल फॉर लोकल” की मुहिम ने खरीदारों में जोश भर दिया. सीएआईटी के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार इस बार की दिवाली पर चीन को भारी आर्थिक झटका लगा है. स्वदेशी पर लोगों के भरोसे ने चीन से आने वाले सामानों की मांग में भारी गिरावट ला दी जिससे चीन को करीब 1 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.
इस साल दिवाली के दौरान हर सेक्टर में खरीदारी का जोश देखने को मिला. फूड एंड ग्रॉसरी, टेक्सटाइल, ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे सभी क्षेत्रों में ग्राहकों ने जमकर खर्च किया. छोटे और मध्यम आकार के उद्योग (MSMEs) के लिए भी यह दिवाली नई उम्मीदें लेकर आई क्योंकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला और रोजगार के नए अवसर भी खुले.
सरकार द्वारा किए गए कर सुधार और ब्याज दरों में राहत ने उपभोक्ताओं के खर्च करने की क्षमता को बढ़ाया. नतीजतन बाजारों में रौनक लौटी और व्यापारी समुदाय के चेहरों पर मुस्कान दिखी.
इस बार की दिवाली सेल्स सिर्फ एक आर्थिक उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की सोच में आए बदलाव की कहानी भी है. जब “वोकल फॉर लोकल” जैसी मुहिम को आम जनता ने अपनाया तो यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ. चीन के आयातित उत्पादों की जगह भारतीय वस्तुओं को प्राथमिकता देने से देश की मैन्युफैक्चरिंग और छोटे उद्योगों को मजबूती मिली.
6.05 लाख करोड़ रुपए की बिक्री सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि यह संदेश है कि भारतीय बाजार अब वैश्विक दबावों के बावजूद आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उपभोक्ताओं की सोच में आया यह बदलाव आने वाले वर्षों में न केवल चीन के लिए बल्कि उन तमाम देशों के लिए भी चुनौती बन सकता है जिनकी अर्थव्यवस्था भारतीय बाजार पर निर्भर है. इस दिवाली ने यह साबित किया कि जब देशवासी स्वदेशी को अपनाते हैं, तो न सिर्फ बाजार बल्कि पूरा भारत रोशन हो जाता है.