Jharkhand SIR: बिहार में मतदाता सूची को लेकर मचे सियासी बवाल के बाद अब चुनाव आयोग झारखंड समेत देश के अन्य राज्यों में भी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की तैयारी कर रहा है. आयोग का मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद खामियों को दूर करना है. राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित सभी राज्यों के सीईओ के दो दिवसीय सम्मेलन में झारखंड की अब तक की तैयारियों की जानकारी दी. बताया कि आयोग के निर्देश के अनुसार, एसआइआर को लेकर तैयारियां की गई हैं. आयोग ने झारखंड सहित अन्य राज्यों को एसआइआर की तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए.
आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर कराने की पूरी जिम्मेदारी उसके पास होगी और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.
दरअसल, साल 2026 में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए आयोग चाहता है कि उन राज्यों में पहले से मतदाता सूची दुरुस्त कर ली जाए ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी न हो. इस योजना के तहत झारखंड में भी मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जाएगा.
बिहार में जब चुनाव आयोग ने एसआईआर शुरू की थी तो वहां विपक्ष ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे. विपक्ष का आरोप था कि मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है और कई जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है. यहां तक कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई जारी है. बिहार के अनुभव से सबक लेते हुए आयोग ने अब झारखंड समेत अन्य राज्यों में इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की तैयारी की है.
हाल ही में केंद्रीय चुनाव आयोग ने देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की थी. इस बैठक में आयोग ने एसआईआर की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिरहित हो. चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि हर राज्य में स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे मतदाता सूची के सत्यापन में कोई गलती न करें.
इस बैठक में यह भी तय किया गया कि झारखंड जैसे राज्यों में एसआईआर के दौरान गांव-गांव और वार्ड-वार्ड जाकर मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन किया जाएगा. नए वोटरों को शामिल करने, पुराने नाम हटाने और डुप्लीकेट एंट्री खत्म करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
झारखंड में एसआईआर की तैयारी चुनावी दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है. बिहार में हुई गड़बड़ियों ने यह साफ कर दिया था कि मतदाता सूची में पारदर्शिता की कमी लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. अब जब चुनाव आयोग झारखंड में यह प्रक्रिया शुरू होगी तो यह राज्य की राजनीतिक तस्वीर को भी प्रभावित कर सकती है.
अगर मतदाता सूची का पुनरीक्षण निष्पक्ष और सही तरीके से होता है, तो इससे न सिर्फ मतदान प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि भरोसा भी कायम होगा. आयोग के लिए यह एसआईआर सिर्फ तकनीकी कवायद नहीं, बल्कि लोकतंत्र की साख बनाए रखने की एक बड़ी परीक्षा भी होगी.
आगामी महीनों में झारखंड में शुरू होने वाली इस प्रक्रिया पर पूरे देश की निगाहें होंगी, क्योंकि यही तय करेगी कि चुनाव आयोग पर जनता का भरोसा कितना बरकरार है.