Big National News: भ्रष्टाचार भारत के सरकारी तंत्र को खोखला कर रहा है और जनता का खून चूस रहा है, यह कड़वा सच फिर सामने आ गया है. राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो की 2025 वार्षिक रिपोर्ट ने फिर से परतें उधेड़ी हैं जिसमें 1.8 लाख शिकायतों, 42 हजार केस स्टडीज और 18 राज्यों के फील्ड सर्वे से डेटा लिया गया. रिपोर्ट 31 अक्टूबर को वायरल हुई और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई.
1. पुलिस विभाग फिर सबसे भ्रष्ट साबित हुआ, जहां हर 100 में 68 लोग थाने चौकी में घूस की बात कबूल करते हैं. FIR दर्ज न करना, चालान माफ कराना, जांच में देरी, सब कुछ पैसे पर टिका है. लखनऊ के एक सर्वे में 78 प्रतिशत ने चोरी की शिकायत के लिए 500 से 5000 रुपये दिए. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2024 रिपोर्ट भी कहती है कि पुलिस में भ्रष्टाचार 14 प्रतिशत बढ़ा है और कानून का रक्षक ही कानून तोड़ रहा है.
2. नंबर राजस्व विभाग - जमीन का खेल, रिश्वत का मेल, जहां म्यूटेशन, रजिस्ट्री, खतौनी सुधार, के लिए 8 हजार से 25 हजार तक की घूस आम है. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश में 82 प्रतिशत जमीन विवादों में रिश्वत घुसती है.
3. नगर निगम - भवन नक्शा पास, सफाई, अवैध निर्माण, अनदेखी, सब पैसों पर. दिल्ली एनसीआर में 91 प्रतिशत बिल्डरों ने 2 से 7 प्रतिशत घूस की बात कही.
4. बिजली विभाग - मीटर कनेक्शन, बिल सुधार में 1500 से 8000 रुपये की रिश्वत, जहां ग्रामीण 64 प्रतिशत उपभोक्ता प्रभावित हैं.
5. परिवहन विभाग - लाइसेंस, फिटनेस के लिए 1000 से 15000 रुपये की वसूली.
6. स्वास्थ्य विभाग - दवा आपूर्ति सर्टिफिकेट में 2000 से 20000 रुपये.
7. शिक्षा विभाग - भर्ती, एडमिशन, फर्जी उपस्थिति में 5000 से 50000 रुपये.
8. आवास विभाग - PMAY, प्लॉट आवंटन में 10000 से 200000 रुपये.
9. आयकर जीएसटी - रिफंड असेसमेंट में 10000 से 500000 रुपये.
10. वन विभाग - पेड़ कटाई परमिशन में 5000 से 100000 रुपये.
भ्रष्टाचार अब सिस्टम की रगों में घुस गया है, अधिकारियों बिचौलियों नेताओं का गठजोड़ जनता को लूट रहा है. JNU अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार कहते हैं कि जवाबदेही पारदर्शिता न आए तो रिपोर्टें आंकड़े ही रहेंगी. वकील प्रशांत भूषण कहते हैं कि पुलिस राजस्व जनता से सीधे जुड़े हैं इसलिए भ्रष्टाचार ज्यादा. सरकार डिजिटल इंडिया, DBT, ई गवर्नेंस का ढोल पीटती है लेकिन स्पीड मनी का डिजिटल रूप ही चल रहा है. परिवहन पोर्टल पर प्रीमियम सर्विस नाम की रिश्वत. 2 से 5 गुना हिस्सा बंटता है, अधिकारी दलालों का खेल. राज्यवार अंतर है लेकिन हर जगह कटौती हो रही है.
समाधान के बिना भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं. डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 प्रतिशत अनिवार्य करें, अधिकारियों की रोटेशन सख्त करें, FIR, म्यूटेशन में समय सीमा तय करें, व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन मजबूत करें, लोकपाल को शक्ति दें. लेकिन इच्छाशक्ति की कमी से सुधार नामुमकिन लगता है.
NCIB रिपोर्ट भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर करती है जहां पुलिस राजस्व जैसे विभाग जनता की सेवा की बजाय लूट का केंद्र बने हुए हैं. 68 प्रतिशत थानों में घूस का आंकड़ा सिस्टम की विफलता दिखाता है जबकि डिजिटल दावे खोखले हैं. राज्यवार अंतर है लेकिन समाधान के बिना भविष्य अंधकारमय है. सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे वरना आम आदमी का विश्वास पूरी तरह टूट जाएगा.