Jamshedpur: टाटा समूह में प्रभाव और नियंत्रण को लेकर तनातनी लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। यह मामला सिर्फ पद और सत्ता की ही नहीं बल्कि भरोसे, रिश्तों और विरासत की भी है।
टाटा संस के पूर्व चेयरमैन दिवंगत रतन टाटा के बहुत करीबी रहे मेहली मिस्त्री को ट्रस्ट से हटाए जाने के बाद मामला अब गर्मा चुका है। मिस्त्री ने ट्रस्ट से खुद बाहर होने से पहले अपना पक्ष रखने के अधिकार की मांग करते हुए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास कैवियट दाख़िल की है। नियमों के अनुसार, ट्रस्ट में होने वाले बदलावों को आयुक्त की मंजूरी के बाद 90 दिनों में लागू करना जरूरी होता है, और इसी प्रक्रिया में मिस्त्री अपनी आवाज उठाना चाहते हैं।
अपने कैवियट में मेहली मिस्त्री ने सर रतन टाटा ट्रस्ट, बाई हीराबाई जमशेदजी नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट से हटाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। उनका साफ कहना है कि किसी भी बदलाव से पहले उन्हें सुना जाए. क्योंकि यह ट्रस्ट सिर्फ संस्था नहीं, बल्कि दशकों की निष्ठा और विश्वास का प्रतीक है।
यह विवाद तब उभरा जब अक्टूबर में टाटा ट्रस्ट्स ने मिस्त्री की आजीवन ट्रस्टीशिप का नवीनीकरण रोक दिया। इस फैसले से संगठन के भीतर भी मतभेद सामने आए. विजय सिंह, नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन जैसे वरिष्ठ सदस्यों ने इस पर असहमति जताई।
वहीं दूसरी तरह रतन टाटा की बहनें शिरिन जीजीबॉय और दियाना जीजीबॉय ने मिस्त्री को हटाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। उनकी आवाज में दर्द साफ झलकता है। उन्होंने इसे प्रतिशोधी कदम बताते हुए कहा कि रतन टाटा के गुजरने के सिर्फ एक साल बाद ही उनकी मूल भावनाओं और मूल्यों को आघात पहुंचाया जा रहा है।